Garud Puran: हिंदू धर्म में अंतिम संस्कार से जुड़े हर रिवाज के पीछे कोई ना कोई गहरी वजह छुपी है। आपने अक्सर देखा होगा कि मृत्यु के बाद व्यक्ति की नाक और कान में रुई (कपास) लगा दी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं इसके पीछे का सच क्या है? इसका रहस्य गरुड़ पुराण में विस्तार से बताया गया है।
क्या कहता है गरुड़ पुराण?
गरुड़ पुराण के अनुसर मनुष्य के शरीर में 9 द्वार (चेहरा के 7 और नीचे के 2) होते हैं। मौत के बाद आत्मा इन्ही द्वारो से बाहर निकलती है। कहते हैं कि मृत्यु के बाद भी शरीर से हवा और बैक्टीरिया का आना-जाना लगा रहता है। अगर इन छिलड़ों को बंद न किया जाए तो बुरे तत्व और कीतनु शरीर में प्रवेश कर सकते हैं, जिसकी आत्मा को मुक्ति मिलने में कठिनाई होती है। इसलिए, कान और कभी-कभी मुंह में रुई लगाकर शरीर को पवित्रा और सुरक्षित रखा जाता है।
शरीर को खराब होने से बचाना
वैज्ञानिक रूप से देखने पर, मौत के बाद शरीर से तारल पदारथ बाहर आने लगते हैं। नाक-कान में रुई लगाने से ये तरल बाहर नहीं आता और शरीर ज्यादा देर तक साफ रहता है, जिसके अंतिम दर्शन में परेशानी नहीं होती।
कीटों से रक्षा
खुले बच्चों से कीड़े-मकोड़े शरीर के अंदर जा सकते हैं। रुई एक प्राकृतिक फ़िल्टर का काम करती है।
सम्मान और पवित्रता
गरुड़ पुराण में मृत शरीर को पवित्र माना गया है। घर में रखने से पहले उसे शुद्ध करना जरूरी होता है। रुई लगाना इसी शुद्धिकरण का एक हिसा है, ताकि परिवार को किसी प्रकार का संक्रमण न हो।
इसलिए ये सिर्फ एक रिवाज नहीं, बाल्कि धर्म और विज्ञान का संगम है। अगली बार जब आप ये देखेंगे, तो समझ जाएगा कि ये आत्मा की शांति और शरीर के सम्मान के लिए किया जाता है।
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