Monday, September 28, 2026

Pitra Paksha 2026: दोपहर में श्राद्ध करना क्यों माना जाता है श्रेष्ठ? जानें इसकी धार्मिक वजह और सही विधि

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Pitra Paksha 2026: सनातन धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। यह समय पूर्वजों को याद करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने का होता है। साल 2026 में पितृ पक्ष 27 सितंबर, रविवार से शुरू हो रहा है और इसका समापन 10 अक्टूबर, शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या के दिन होगा। पूर्णिमा श्राद्ध 26 सितंबर को मनाया जाएगा।

अक्सर लोगों के मन में सवाल होता है कि श्राद्ध के लिए दोपहर का समय ही क्यों सबसे अच्छा माना जाता है। शास्त्रों में इसके पीछे स्पष्ट कारण बताया गया है।

दोपहर में ही क्यों होता है श्राद्ध?

हिंदू पंचांग और गरुड़ पुराण के अनुसार, दिन के 3 प्रहर होते हैं। दोपहर का समय जिसे ‘कुतुप मुहूर्त’ कहा जाता है, वह पितरों के लिए सबसे प्रिय माना जाता है।

  • कुतुप मुहूर्त: दोपहर 11:36 से 12:24 बजे तक का समय कुतुप मुहूर्त कहलाता है। मान्यता है कि इस समय में किया गया दान और भोजन सीधे पितरों तक पहुंचता है।
  • पितरों का समय: शास्त्रों के अनुसार, सुबह का समय देवताओं का और दोपहर का समय पितरों का होता है। इसलिए दोपहर में पितरों को भोग लगाने से वे तृप्त होते हैं।
  • सूर्य की स्थिति: जब सूर्य सिर के ऊपर होता है, तो उस समय पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है।

इसलिए कोशिश करें कि श्राद्ध का मुख्य कर्म 11 बजे से 2 बजे के बीच ही संपन्न कर लें।

श्राद्ध की सही विधि

श्राद्ध हमेशा पितर की मृत्यु तिथि पर ही करना चाहिए, न कि अपनी सुविधा के अनुसार।

सही विधि इस प्रकार है:

  1. संकल्प और स्नान: सुबह स्नान करके पवित्र वस्त्र धारण करें और हाथ में जल, कुश और तिल लेकर पितरों के नाम का संकल्प लें।
  2. तर्पण: दक्षिण दिशा की ओर मुख करके काले तिल, जल और कुश से पितरों को तर्पण दें।
  3. पिंडदान: जौ, चावल के आटे, तिल और शहद से बने पिंड पितरों को अर्पित करें।
  4. ब्राह्मण भोज: श्राद्ध में बनाए गए सात्विक भोजन (बिना लहसुन-प्याज के) सबसे पहले गाय, कौवे और कुत्ते के लिए निकालें, फिर किसी योग्य ब्राह्मण को भोजन कराएं।
  5. दान: ब्राह्मण को भोजन के बाद यथाशक्ति दक्षिणा, वस्त्र और अन्न का दान करें।

इन बातों का रखें ध्यान

चतुर्दशी तिथि पर केवल अकाल मृत्यु वाले पितरों का ही श्राद्ध किया जाता है। जिनकी मृत्यु तिथि याद न हो, उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या यानी 10 अक्टूबर को किया जाएगा।

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