Pitra Paksha 2026: हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। इस साल पितृ पक्ष 27 सितंबर 2026 से शुरू हो रहा है और 10 अक्टूबर 2026 तक चलेगा। मान्यता है कि इन 15 दिनों के दौरान हमारे पितर पितृलोक से धरती पर आते हैं और अपने परिजनों के आस-पास ही रहते हैं।
इस दौरान पितर किसी भी रूप में हमारे घर आ सकते हैं, इसलिए किसी भी जीव या मेहमान का अनादर नहीं करना चाहिए। गरुड़ पुराण में भी इसका जिक्र मिलता है।
इन 5 रूपों में आ सकते हैं पितर
कौवे के रूप में
पितृ पक्ष में कौवे का सबसे ज्यादा महत्व है। कहा जाता है कि कौवा यमराज का दूत होता है। श्राद्ध का भोजन सबसे पहले कौवे को ही खिलाया जाता है। अगर पितृ पक्ष में कौवा आपके घर की छत पर आकर कांव-कांव करे तो समझिए आपके पितर आपसे कुछ कहना चाहते हैं। उसे भोजन जरूर कराएं।
गाय के रूप में
गाय में 33 कोटि देवी-देवताओं का वास माना जाता है। पितृ पक्ष में अगर गाय आपके दरवाजे पर आ जाए तो उसे रोटी, गुड़ और हरा चारा जरूर खिलाएं। इसे बहुत शुभ माना जाता है।
कुत्ते के रूप में
कुत्ते को भैरव का प्रतीक माना जाता है। पितृ पक्ष में कुत्ते को भोजन कराने से पितर प्रसन्न होते हैं और केतु ग्रह के दोष से भी मुक्ति मिलती है।
चींटियों के रूप में
अगर आपके घर में काली चींटियों की कतार दिखे तो उन्हें आटा और शक्कर मिलाकर डालें। मान्यता है कि इस रूप में भी पितर भोजन ग्रहण करते हैं।
किसी भूखे ब्राह्मण या भिखारी के रूप में
पितृ पक्ष में अगर कोई भूखा व्यक्ति या ब्राह्मण आपके द्वार पर भोजन मांगने आए तो उसे कभी खाली हाथ न लौटाएं। कहा जाता है कि पितर इसी रूप में अपने वंशजों की परीक्षा लेते हैं।
क्या कहते हैं पंडित जी?
गया जी के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पंडित राकेश झा बताते हैं, “पितृ पक्ष में किसी भी जीव को सताना नहीं चाहिए। इन दिनों किया गया दान सीधे पितरों तक पहुंचता है। कौवे, गाय और कुत्ते को भोजन कराने से पितृ दोष शांत होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।”
इसलिए इस पितृ पक्ष में इन 5 रूपों का विशेष ध्यान रखें और उनका अनादर भूलकर भी न करें।
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