Nahay-Khay 2026: छठ महापर्व का पहला दिन नहाय-खाय होता है। इस बार नहाय-खाय शुक्रवार, 13 नवंबर 2026 को है। इसी दिन से छठ का 4 दिन का महाव्रत शुरू हो जाता है।नहाय मतलब नहाना और खाय मतलब खाना। इस दिन व्रती गंगा, नदी या घर में ही शुद्ध पानी से स्नान करके शुद्ध कपड़े पहनती है। उसके बाद ही एक बार सात्विक भोजन करती है। इस दिन से घर में शुद्धता का नियम शुरू हो जाता है।
कद्दू-भात ही क्यों बनता है?
ये सबसे बड़ा सवाल है। नहाय-खाय के दिन कद्दू यानी लौकी की सब्जी, चना दाल और भात (चावल) बनता है।
- पेट के लिए हल्का: लौकी ठंडी होती है, इससे अगले 3 दिन के कठिन व्रत के लिए पेट तैयार हो जाता है।
- शुद्ध भोजन: इसमें लहसुन-प्याज नहीं पड़ता। ये पूरी तरह सात्विक होता है।
- छठी मैया का प्रसाद: माना जाता है कि कद्दू-भात छठी मैया को सबसे प्रिय है। इसलिए इसी से व्रत की शुरुआत होती है।
भूलकर भी ये मत करना:
- इस दिन सुबह जल्दी उठकर घर की अच्छे से सफाई करें।
- व्रती के खाने के लिए अलग से मिट्टी के चूल्हे या साफ बर्तन का इस्तेमाल करें।
- इस दिन एक ही बार खाना खाया जाता है, वो भी बिना लहसुन-प्याज के।घर में मांस, अंडा, शराब पूरी तरह बंद कर दें।
- व्रती के खाने के बाद ही घर के बाकी लोग खाना खाते हैं।
नहाय-खाय के बाद क्या होगा?
नहाय-खाय के बाद दूसरा दिन खरना (14 नवंबर, शनिवार), तीसरा दिन संध्या अर्घ्य (15 नवंबर, रविवार) और चौथा दिन उषा अर्घ्य (16 नवंबर, सोमवार) होगा।
निष्कर्ष:
नहाय-खाय सिर्फ खाना नहीं है, ये छठ व्रत की आत्मा है। जो इस दिन को पूरी शुद्धता से करता है, उसकी छठ पूजा सफल मानी जाती है।
ये भी पढ़ें- Chhath Puja 2026: छठ पूजा में नहाय खाय कब है? खरना से लेकर उषा अर्घ्य तक पूरी लिस्ट

