Thursday, October 22, 2026

Karwa Chauth 2026: 28 या 29 अक्टूबर, कब है करवा चौथ? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा

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Karwa Chauth 2026: करवा चौथ 2026 कब है? इस बार करवा चौथ की तारीख को लेकर बहुत कन्फ्यूजन है। कई जगह 28 अक्टूबर तो कई जगह 29 अक्टूबर बताया जा रहा है। अगर आप भी इसी उलझन में हैं तो चिंता मत कीजिए, आज हम आपको पंचांग के अनुसार सही तारीख बता रहे हैं।

करवा चौथ 2026: 28 या 29 अक्टूबर?

पंचांग के अनुसार करवा चौथ भारत में गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को मनाया जाएगा।

कन्फ्यूजन इसलिए हो रहा है क्योंकि चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 1:06 AM से शुरू होकर रात 10:09 PM तक रहेगी। चाँद का दीदार इसी तिथि में होगा, इसलिए 29 तारीख ही सही मानी गई है। अमेरिका और कनाडा में टाइम जोन के कारण यह 28 अक्टूबर को पड़ेगा, लेकिन भारत के लिए 29 अक्टूबर ही सही है।

शुभ मुहूर्त और चांद निकलने का समय

  1. करवा चौथ की तारीख: 29 अक्टूबर 2026, गुरुवार
  2. चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 29 अक्टूबर, रात 1:06 बजे
  3. चतुर्थी तिथि समाप्त: 29 अक्टूबर, रात 10:09 बजे
  4. पूजा का शुभ मुहूर्त: शाम 5:38 PM से 6:56 PM तक
  5. चांद निकलने का समय (दिल्ली): रात 8:17 PM के आसपास

आपके शहर में चांद: लखनऊ – 8:06 PM, कोलकाता – 7:47 PM, मुंबई – 9:00 PM

करवा चौथ पूजा विधि

  1. सरगी: करवा चौथ के दिन सुबह सूर्योदय से पहले सरगी खाएं। सास अपनी बहू को सरगी देती है। इसमें फल, मिठाई और सेवई होती है। सरगी खाने के बाद निर्जला व्रत शुरू हो जाता है।
  2. श्रृंगार और व्रत: पूरा दिन बिना पानी के व्रत रखें। शाम को दुल्हन की तरह सोलह श्रृंगार करें। लाल साड़ी या लहंगा पहनें।
  3. पूजा की तैयारी: शाम को पूजा के मुहूर्त में एक जगह करवा, छलनी, दीया, सिंदूर, और कथा की किताब रखें। भगवान शिव, माता पार्वती और गणेश जी की पूजा करें।
  4. कथा सुनना: सभी सुहागिन महिलाएं एक साथ बैठकर करवा चौथ की व्रत कथा सुनती हैं।
  5. चांद की पूजा: चाँद निकलने पर छलनी से पहले चांद को देखें, फिर अपने पति को देखें। चांद को अर्घ्य देकर अपने पति के हाथ से पानी पीकर व्रत तोड़ें।

करवा चौथ की कथा

एक साहूकार के सात बेटे और एक बेटी वीरवती थी। करवा चौथ पर वीरवती ने व्रत रखा, लेकिन भूख से उसकी हालत खराब हो गई। भाइयों ने एक पेड़ पर छलनी में दीया रखकर उसे चांद बताया। वीरवती ने उसे असली चांद समझकर व्रत तोड़ दिया, जिससे उसके पति की मृत्यु हो गई। बाद में उसने माता पार्वती से प्रार्थना की और यमराज से अपने पति के प्राण वापस लाई। तभी से यह व्रत पति की लंबी उम्र के लिए रखा जाता है।

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