Sharad Purnima 2025: शरद पूर्णिमा साल की सबसे सुंदर रात होती है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से भरकर अमृत बरसाता है। इसलिए इस रात खीर को चांदनी में रखकर खाने से शरीर निरोगी और मन पवित्र हो जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं इसके पीछे असली धार्मिक और वैज्ञानिक कारण क्या है?
क्यों रखते जाते हैं शरद पूर्णिमा पर खीर
पौराणिक कथा के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी और चंद्रदेव का जन्म हुआ था। समुद्र मंथन से जब अमृत निकला था, तब चंद्रमा में ही अमृत है। इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। जो भक्त इस रात खुले आसमान के नीचे चांदनी में खीर रखकर मां लक्ष्मी को भोग लगाता है, उसके घर में कभी धन-धान्य की कमी नहीं होती। खीर सफेद है, जो चंद्रमा और लक्ष्मी दोनों को प्रिय है।
खीर में अमृत कैसे आता है? वैज्ञानिक कारण
वैज्ञानिकों के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा धरती के सबसे करीब होता है। इस रात चंद्रमा की किरणों में विशेष प्रकार के लवण और विटामिन होते हैं जो दूध में जल्दी घुल जाते हैं। आयुर्वेद में भी कहा गया है कि इस रात की चांदनी में रखी खीर शीतल और औषधीय गुणों से भर जाती है, जो पित्त दोष को शांत करती है और आंखों की रोशनी बढ़ाती है।
अमृत वाली खीर बनाने और रखने का सही तरीका
- शाम को गाय के दूध में चावल डालकर खीर बनाएं, इसमें मिश्री जरूर डालें।
- खीर को चांदी या मिट्टी के बर्तन में रखें, स्टील में न रखें।
- रात 10 बजे से 12 बजे के बीच खीर को छलनी या बारीक कपड़े से ढककर छत पर चांदनी में रखें।
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में तुलसी का एक पत्ता डालकर पहले भगवान को भोग लगाएं, फिर प्रसाद के रूप में परिवार में बांटें।
ये 3 गलतियां भूलकर भी न करें
- खीर को बिना ढके न रखें, नहीं तो कीड़े-मकोड़े गिर सकते हैं।
- इस खीर में नमक या खट्टी चीजें न डालें।
- चांदनी में रखी खीर को 24 घंटे के अंदर खा लेना चाहिए।
निष्कर्ष
तो इस शरद पूर्णिमा आप भी इस अमृत वाली खीर को जरूर बनाएं और मां लक्ष्मी व चंद्रदेव का आशीर्वाद पाएं। जय श्री लक्ष्मी!
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