Ujjwala Yojana:अयोध्या में प्रधानमंत्री Ujjwala Yojana के तहत रसोई गैस का उपयोग करने वाले अयोध्या जनपद के लाखों गरीब और निम्न आय वर्ग के परिवारों को केंद्र सरकार के एक नए फैसले से बड़ा झटका लगा है। जिले के लगभग सवा दो लाख से अधिक उज्ज्वला गैस कनेक्शन धारकों के लिए अब सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या में भारी कटौती कर दी गई है। नई व्यवस्था के तहत अब लाभार्थियों को एक वित्तीय वर्ष के भीतर केवल चार एलपीजी सिलेंडरों पर ही सरकार की ओर से दी जाने वाली सब्सिडी का सीधा लाभ मिल सकेगा, जबकि इससे पहले तक उन्हें प्रति वर्ष नौ सिलेंडरों पर यह छूट प्रदान की जा रही थी।
अतिरिक्त सिलेंडर मंहगे दमों में खरीदना होगा
इस नए और कड़े प्रावधान के आधिकारिक रूप से धरातल पर लागू होने के बाद, यदि किसी परिवार को साल में चार से अधिक सिलेंडरों की आवश्यकता होती है, तो उन्हें पांचवां और उसके बाद के सभी अतिरिक्त सिलेंडर पूरी तरह से बाजार मूल्य यानी बिना सब्सिडी वाली ऊंची दरों पर ही खरीदने होंगे। अचानक हुए इस बदलाव के कारण ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के गरीब परिवारों के घरेलू रसोई बजट पर सीधा और प्रतिकूल असर पड़ने की प्रबल आशंका जताई जा रही है, जिससे उनके सामने आर्थिक मुश्किलें और ज्यादा बढ़ सकती हैं।
अगर इस योजना के इतिहास और नियमों में हुए बदलावों पर नजर डालें, तो Ujjwala Yojana की शुरुआत के समय लाभार्थियों को प्रति वर्ष 12 सब्सिडी वाले सिलेंडर दिए जाते थे। बाद में सरकार ने नियमों में संशोधन करते हुए इस संख्या को घटाकर नौ कर दिया था, और अब उपभोक्ताओं की औसत खपत का हवाला देते हुए इस कोटे को और अधिक सीमित करके मात्र चार सिलेंडर प्रति वर्ष तय कर दिया गया है। वर्तमान व्यवस्था के तहत, 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर पर केंद्र सरकार की ओर से लगभग 350 रुपये की भारी सब्सिडी सीधे लाभार्थी के आधार लिंक बैंक खाते में डीबीटी के माध्यम से भेजी जाती है, जो कि अब साल में सिर्फ चार बार ही मिल पाएगी।
एलपीजी की आसमान छूती कीमतें
इस नीतिगत निर्णय के सामने आने के बाद से ही अयोध्या जनपद के ग्रामीण अंचलों और कस्बों के हजारों लाभार्थियों में गहरी नाराजगी और मायूसी देखी जा रही है। उपभोक्ताओं का साफ कहना है कि एक तरफ जहां पहले से ही बढ़ती महंगाई और एलपीजी की आसमान छूती कीमतों ने आम आदमी की कमर तोड़ रखी है, वहीं दूसरी तरफ सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या को आधे से भी कम करने से उनके मासिक खर्च में अप्रत्याशित वृद्धि होना तय है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले तमाम ऐसे परिवार हैं जो पूरी तरह से खाना पकाने के लिए केवल इसी एलपीजी गैस पर निर्भर हैं, और उनके लिए बाजार दर पर अतिरिक्त गैस सिलेंडर का प्रबंध करना बेहद चुनौतीपूर्ण और आर्थिक रूप से कष्टकारी साबित हो रहा है।
इस पूरे संवेदनशील मामले पर जिले के प्रशासनिक रुख को स्पष्ट करते हुए जिला पूर्ति अधिकारी (डीएसओ) बृजेश मिश्रा ने आधिकारिक जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि जिला स्तर पर सब्सिडी वाले सिलेंडरों की संख्या कम करने का यह निर्णय स्थानीय प्रशासन का नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा लिया गया एक केंद्रीय नीतिगत फैसला है। उन्होंने साफ तौर पर स्पष्ट किया कि नई और संशोधित व्यवस्था के तहत सभी चिन्हित 2.27 लाख लाभार्थियों को वर्ष में केवल शुरुआती चार सिलेंडरों की रिफिलिंग पर ही निर्धारित सब्सिडी ट्रांसफर की जाएगी, जबकि इसके बाद उनके द्वारा बुक कराए जाने वाले किसी भी सिलेंडर पर कोई सब्सिडी या वित्तीय छूट लागू नहीं होगी और उन्हें पूरा व्यावसायिक भुगतान करना होगा।
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