Tuesday, June 2, 2026

Maa Baglamukhi: मां बगलामुखी के इन चमत्कारों को किसी ने नहीं सुना होगा

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Maa Baglamukhi: हमारे धर्म में कई देवी देवता है। जिनका महत्व हमारे जीवन में बेहद महत्वपूर्ण है । इनमें से ही एक देवी जिनका नाम है बगलामुखी जिनके बारे में हम जानेगें तो ध्यान से पढ़ें- बचपन से एक बात सुनते आ रहे हैं कि पीला रंग है स्थिरता का रंग। मां को प्रसन्न करने के लिए राम जी ने पूरा अभिषेक वो पीले फूलों से किया। रावण को हराना और लगातार कठिन हो रहा था। पूरी सृष्टि अंत के कगार पर पहुंच गई समय के पहले। तब स्वयं विष्णु भगवान ने प्रार्थना करनी शुरू की। बता दें कि जिनके नाम से गति भी रुक जाती है।

पीले रंग का है विशेष महत्व

आइए अब बात करते है कि मां का नाम की Maa Baglamukhi। हल्दी से उनका अभिषेक क्यों किया जाता है? महाविद्या में से कौन सी स्वरूप है वो? पीले रंग से इनका क्या लगाव है? बगलामुखी देवी को सिर्फ जाना जाता है शत्रु नाश के लिए। लेकिन क्या बगलामुखी सिर्फ यहीं तक सीमित है? कब प्रकट हुई वो? कहां प्रकट हुई वो? तो आज हम जानेगें एक-एक करके बगलामुखी देवी के बारे में सारी बातें। तो वो आपके लिए क्या कर सकती हैं? कैसे कर सकती हैं? यह सारी बातें इस आर्टिकल के आप और हम जानने वाले हैं।

मां के नाम से रुक जाती है समय की गति

यूं तो हम बचपन से सुनते आ रहे है कि समय कभी किसी के लिए नहीं रुकता। लेकिन भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं में एक ऐसी भी देवी हैं जिनके नाम से गति भी रुक जाती है। जिनमें यह शक्ति है कि वह किसी भी चीज को थाम ले, रोक दे, स्थाई कर दे। कौन है? नाम है Maa Baglamukhi।

आज भी बहुत सारे लोगों ने सिर्फ इनका नाम सुना होगा। कुछ ने वह भी नहीं सुना होगा। और जिन लोगों ने भी सुना होगा ना उन्होंने सुना होगा कि बगलामुखी देवी को सिर्फ जाना जाता है शत्रु नाश के लिए या कोर्ट कचहरी, कोर्ट केसेस को शांत करने के लिए या फिर किसी को चुप करा देने के लिए है। लेकिन क्या बगलामुखी सिर्फ यहीं तक सीमित है? या इससे भी ज्यादा कुछ है जो हमको पता होना चाहिए लेकिन पता नहीं है। सब जानेगें इस आर्टिकल के माध्यम से तो ध्यान से सुनिएगा क्योंकि यह आपसे जुड़ी हुई बातें हैं।

आइए जानते है मां बंगलामुखी को कैसे प्रसन्न किया जा सके

ये सारी बाते आपके बहुत काम की हैं। क्योंकि अगर आपको बगलामुखी देवी के बारे में नहीं पता है तो वह आपके लिए क्या कर सकती हैं, कैसे कर सकती हैं। उनको प्रसन्न करने के लिए क्या-क्या करना होता है और उनको प्रसन्न करने के लिए कौन से मंदिर में जाना है।

सारी बातें मैं आपको इस आर्टिक को पढ़कर मिल जाएंगी। तो आज हम खोलेंगे एक-एक करके Maa Baglamukhi देवी के बारे में सारी बातें। सारे परत जैसे कि कैसे प्रकट हुई वह कब प्रकट हुई वो? कहां प्रकट हुई वो? पीले रंग के ही फूल और पीले रंग के वस्त्र उन पे क्यों चढ़ाए जाते हैं? हल्दी से उनका अभिषेक क्यों किया जाता है? महाविद्या में से कौन सी स्वरूप हैं वो? है ना?  उनकी मूर्ति के सारे प्रतीकों का अर्थ और अंत में हम जानेंगे एक ऐसा रहस्य, एक ऐसी बात जो आपने इसके पहले कभी नहीं सुनी होगी। लेकिन ये सारी चीजों की शुरुआत कहां से होती है? सबसे बड़े रहस्य से वो है Maa Baglamukhi का नाम।

क्या है इस नाम के पीछे का रहस्य

क्या है इस नाम के पीछे? मां बगलामुखी 10 महाविद्याओं में से आठवीं महाविद्या स्वरूप मानी जाती है। आसान भाषा में समझे तो जितने भी महाविद्या स्वरूप है वह सब सृष्टि के अलग-अलग शक्तियों के प्रतीक है। जैसे मां काली जो है वह समय की शक्ति है। त्रिपुरा सुंदरी संतुलन बैलेंस की देवी है। वैसे Maa Baglamukhi किसी भी चीज को रोक देने की शक्ति रखती है। किसी भी चीज को थाम सकती है।

बगलामुखी आपकी इंद्रियों को कंट्रोल कर सकती

कई लोग मानते हैं, कई लोग कह देते हैं कि बगला शब्द जो है वह बगुला पक्षी से आया है। पर यह सच नहीं है। बगला जो शब्द आया है इसमें उसका पहले तो असल उच्चारण जो है वो है व्गा। वगा कहां से आता है? जब आप तंत्र की गुप्त गहराइयों में जाते हैं तो आपको एक शब्द मिलता है व्गा। वगा का मतलब होता है लगाम। घोड़े पे जो लगाम लगती है। लगाम क्या करती है?

घोड़े पे जो लगाम होती है वो करती क्या है? अह घोड़ा तेजी से चल रहा है। आप जब उसको लगाम को पीछे खींचते हैं, तो घोड़ा अपनी जगह पे रुक जाता है। किसी भी चीज को रोकने के लिए आपको लगाम चाहिए होती है।

जैसे कहावत है ना अपनी जुबान पे लगाम लगाओ। यह कहां से आता है? कि लगाम वो शब्द होता है जिसका मतलब ही होता है कि रुक जाओ बस करो। तो वगा जो है वो तंत्र की गहराइयों से आता है जिसका मतलब होता है थामना, रोकना। यही है Maa Baglamukhi की शक्ति।

सबको थामने की शक्ति है Maa Baglamukhi

तो बगलामुखी की जो शक्ति है वह आपकी इंद्रियों को कि आपका मुंह गलत जगह पर गलत चल रहा है। आप ओवरथिंकिंग कर रहे हैं। इस तरह की कोई भी चीज आप रह ड्राइविंग कर रहे हैं। बगलामुखी आपकी इंद्रियों को कंट्रोल कर सकती है।

बगलामुखी आपके दुश्मनों को कंट्रोल कर सकती है और बगलामुखी आपकी नियति को भी कंट्रोल कर सकती है। रोक सकती है। नियति डेस्टिनी। तो अगर आपकी नियति गलत जा रही है, आपकी इंद्रियां गलत जा रही है, आपके दुश्मन आपके प्रति गलत जा रहे हैं, तो इन सबको थामने की शक्ति मां बगलामुखी के पास है। इन सब चीजों की लगाम बगलामुखी अपने हाथ में रखती है। विज्ञान में इसे स्टैटिक एनर्जी कहा गया है। थमी हुई एनर्जी लेकिन तंत्र विद्या में इसे कहा गया स्तंभन शक्ति। स्तंभन शक्ति का मतलब जो स्तंभ के जैसे खड़े रहे, रुक जाए।

तो कहा जाता है कि सतयुग में एक ऐसा समय आया जब पूरी सृष्टि अंत के कगार पर पहुंच गई। समय के पहले आकाश से आग बरस रही थी।

भगवान विष्णु ने की थी Maa Baglamukhi से प्रर्थना

समंदर में बड़े-बड़े तूफान आ रहे थे। पूरा ब्रह्मांड हिल रहा था और वैसे समय में स्वयं विष्णु भगवान ने प्रार्थना करनी शुरू की। तब प्रकट हुई बगलामुखी और उन्होंने एक ही पल में सब कुछ रोक दिया।

ऐसा लगा जैसे कि सृष्टि में, समय में, सब चीजों में किसी ने पॉज का बटन दबा दिया कि अचानक से सब कुछ एक झटके में रुक गया। यह शक्ति थी बंगलामुखी की जिनको पहली बार पृथ्वी पर बुला के चीजों को शांत कराने के लिए खुद विष्णु जी ने प्रार्थना की थी। एक और कहानी है इसी से जुड़ी हुई। तो आपने देवी बगलामुखी की प्रतिमा देखी होगी, मूर्ति देखी होगी। उनके एक हाथ में गधा है

और दूसरे हाथ में उन्होंने पकड़ रखी है एक असुर की जीभ। टंग तो यह जो असुर था इसका नाम था मदन और इसकी जो क्षमता थी इसकी जो शक्ति थी वो उसकी वाहक शक्ति थी। वह जो बोलता था वो सच हो जाता था। तो वह किसी को भी कुछ भी बोल के करवा सकता था। अब उसको हराने का एक ही तरीका था कि उसकी जबान को लगाम लगाया जाए।

मांं बंगलामुखी ने पकड़ी एक हाथ से जीभ

उसका चलता हुआ मुंह रोक दिया जाए। इसीलिए वह मूर्ति इसी चीज का प्रतीक है कि बिना उससे युद्ध किए असुर मदन का Maa Baglamukhi ने एक हाथ से जीभ पकड़ी। दूसरे हाथ में गधा था। ताकि वह कुछ बोल ही ना पाए। जब वो कुछ बोल ही नहीं पाया तो बिना लड़े हार गए क्योंकि उसकी उसका सुपर पावर वही था। उसकी शक्ति वही थी और उसको बोलने ही नहीं दिया गया। तो वो अपने मन मुताबिक कुछ करा ही नहीं पाया। अब जो मैंने आपको दो कहानियां सुनाई।

एक विष्णु जी ने प्रार्थना करके बगलामुखी देवी को बुलाया और सब चीजें झटके से शांत हुई और दूसरा असुर मदन की कहानी जिसकी जीभ पकड़ के बहुत सारे कुकृत्य को बहुत सारी अनहोनी होने से बचा लिया। तो जब आप इन दोनों कहानियों को एक साथ सुनेंगे तो आपको खुद समझ में आएगा कि मां बगलामुखी को क्यों पूजा जाता है। उनकी क्या शक्तियां हैं।

राम जी ने की थी मां बगलामुखी का उपासना

और लेकिन वो आज के समय में हम लोगों के जीवन में क्या प्रभाव डालती है? हमारे ऊपर उसका क्या असर है और उनका मंदिर कहां है? पीले रंग से उनका क्या लगाव है और बहुत सारी और चीजें बची हैं जो आपको जानना चाहिए। आपको दो कहानियां बता चुके है। एक असुर मदन की और एक विष्णु जी की। मगर सबसे जरूरी कहानी अब बताएगें कहानी आपको ले जाती है राम जी के पास। तो हुआ यह कि जब रावण से राम का युद्ध शुरू हुआ तब राम को समझ में आया कि सिर्फ बलशाली नहीं है। सिर्फ लंबी चौड़ी सेना नहीं है बल्कि ज्ञानी भी है। सारे वेदों और पुराणों का भी ज्ञान रखता है और साथ में तंत्र विद्या को भी बहुत अच्छे से जानता है।

तो इसलिए रावण को हराना और लगातार कठिन हो रहा था। तब राम जी ने मां बगलामुखी की आराधना की उपासना की और उनसे मदद मांगी। हे मां आप आइए और रावण की जो तंत्र शक्ति है तंत्र विद्या है उसको रोकिए। वाणी की जो ताकत है उसको रोकिए। ज्ञान का जो प्रवाह है उसको रोकिए ताकि वह एक जगह स्थिर हो। उसकी जुबान स्थिर हो। उसकी सोच स्थिर हो। उसकी तंत्र विद्या स्थिर हो ताकि बराबरी से युद्ध हो सके। और यह करने के लिए मां को प्रसन्न करने के लिए राम जी ने उनका जो पूरा अभिषेक किया वह पीले फूलों से किया और साथ में हल्दी का अभिषेक किया।

क्या है विशेष चढ़ावा?

उस समय से प्रथा चली आ रही है कि मां को पीले रंग का चढ़ावा होता है। मां को पीले रंग से खास लगाव है। पीले रंग का अपना अस्तित्व है। वह भी बताऊंगा। पीला रंग है स्थिरता का रंग। शांति का रंग। पीले रंग को देख के आपको ठंडक महसूस होती है, शांति मिलती है। तो हर चीज को शांत करना, हर चीज को थाम लेना यह यहां पर भी बगलामुखी मां ने किया रावण के साथ। तो रावण को स्थिर किया ताकि राम और रावण का युद्ध बराबरी में हो सके और तब जाकर राम जी बगलामुखी देवी की मदद से जीते।

पीला रंग हमको उस ठहराव की तरफ उस स्थिरता की तरफ ले जाता है जहां पर प्रतिक्रिया नहीं है। स्थिरता है, नियंत्रण है। तो कंट्रोल जहां पे है वहां पर पीले रंग को याद किया जाता है। पीले रंग की यह शक्ति होती है कि वह आपको ठंडा रखता है। नियंत्रित करता है ना कि प्रतिक्रिया की तरफ बढ़ाता है। जैसा कि मैंने आपको पहले भी बताया कि वह सिर्फ दुश्मनों को शांत नहीं करती है। वह आपकी इंद्रियों को भी शांत करती है। अगर आप उनकी पूजा करेंगी, कई बार होता है ना आप गुस्से में कुछ ऐसी चीज बोल गए जो आपको लगता है नहीं बोलना चाहिए था।

दुश्मनों को रोकती है Maa Baglamukhi

लेकिन गुस्से में तो बोल रहे हैं। वापस तो ले नहीं सकते। ऐसी गलतियां होने के पहले ही रोक लिया जाएगा। अगर आप मां बगलामुखी की पूजा करेंगे उनको पीले वस्त्र, उनको पीले पुष्प और उनको हल्दी चढ़ाएंगे तो। ऐसी बहुत सारी और चीजें होती हैं। लेकिन फिलहाल बता दें कि पीले रंग का अपने आप में क्या महत्व होता है। किस तरीके से हमारे धर्म ग्रंथ पीले रंग को देखते हैं।

लाल प्रतीक है खून का, खतरे का। पता है ना? वैसे ही पीला प्रतीक है शांति का, नियंत्रण का। अब वो नियंत्रण अगर आप अपने ऊपर नियंत्रण खो रहे होंगे तो बगलामुखी आपको गलत प्रतिक्रिया देने से बचा लेंगी। अगर आपका दुश्मन नियंत्रण खो के आपका नुकसान करने आ रहा होगा तो आपके दुश्मन को रोक दिया जाएगा। क्यों? क्योंकि आप उपासक हैं बगलामुखी देवी के। तो आपका कोई नुकसान करने वाला होगा तो मां बगलादेवी आपका ख्याल रखेंगी।

क्यों कहते है Maa Baglamukhi को पीतांबरा देवी

इसी के तहत यह भी आता है कि अगर आपकी नियति में कोई अड़चन है, अगर आप ही का डेस्टिनी आपका दुश्मन बन रहा है तो उसको भी बगलामुखी अपनी शक्ति से रोक देंगे। और पीले रंग की वजह से ही मां बगलामुखी को पीतांबरा देवी भी कहते हैं। पीतांबरा पीला रंग। भारत में कुछ ऐसे भी स्थान है जहां बगलामुखी देवी को सिर्फ माना नहीं जाता, पूजा नहीं जाता बल्कि उनको महसूस भी किया जाता है।

आपको जाकर वहां सिर्फ मूर्ति नहीं दिखेगी उस मंदिर प्रांगण में उसके आसपास आप अपनी इंद्रियों को नियंत्रित होते हुए महसूस कर पाएंगे। तो साक्षात उनका प्रभाव आप उन जगहों पर जाकर महसूस कर सकते हैं। अद्भुत रामायण, ब्रह्म पुराण इन जगहों पे माता बंगलामुखी के बहुत अच्छे उल्लेख हैं और बहुत सारी और कहानियां हैं जो राम और लक्ष्मण से जुड़ी हुई है। एक ऐसा ही स्थान है नलखेड़ा।

ग्रंथों में लिखी मां बंगलामुखी की सिद्ध बातें

उज्जैन से लगभग 100 किलोमीटर दूर बगलामुखी का एक ऐसा प्राचीन सिद्ध पीठ जहां पर जाना अपने आप में किस्मत की बात है। वहां के स्थानीय लोग और वहां के जो पुजारी हैं उनकी मान्यताओं के हिसाब से बगलामुखी के इस मंदिर की पूजा सीधे लक्ष्मण जी से जुड़ी हुई है। जैसे उसी के पास एक नदी है जिसका  नाम है लखुंदर नदी। वो लखुंदर नदी को भी माना जाता है कि उस लखुंदर नदी का पहले जो नाम था उस एरिया का जो पहले नाम था वह था लक्ष्मण द्वार। उसको बदल के लखुंदर नदी मतलब समय के साथ बदल दिया गया या बदल गया। तो ऐसे ही माना जाता है कि बगलामुखी रहस्य जैसे ग्रंथों में भी इसके बारे में बहुत सिद्ध बातें लिखी हुई है।

वहां जाने पे आज भी आपको त्रेता युग के बहुत सारे संकेत मिलते हैं। वहां ऐसी चीजें हैं जो त्रेता युग के समय से उसका जिक्र हुआ हुआ है। उसके बारे में बात हुई हुई है और वह आज भी वहां हैं। तो यह नलखेड़ा नाम की जो जगह मैंने आपको बताया मध्य प्रदेश में उज्जैन से कुछ दूर वहां पर यह सब कुछ एक ही जगह पर आपको महसूस भी होता है और साक्षात चीजें वहां पर दिखती।

कब मनाई जाती है मां बंगलामुखी की जयंती

भी हैं जो सीधे त्रेता युग से जुड़ी हुई है। लक्ष्मण से जुड़े हुए हैं। राम से जुड़े हुए हैं। इसके अलावा आता है पीतांबरा पीठ दतिया। यह भी मध्य प्रदेश में उत्तर प्रदेश बॉर्डर के पास जहां पे जो सबसे ज्यादा प्रभावशाली और सबसे ज्यादा मान्यता प्राप्त बगलामुखी है। इस मंदिर में पीतांबरा रूप को पूजा जाता है और तांत्रिक गतिविधियों को प्रैक्टिस करने वाले लोग तांत्रिक परंपराओं की साधना करने वालों के लिए यह बहुत ज्यादा मान्यता प्राप्त जगह है। तो मां बगलामुखी के बारे में किसी एका आध ग्रंथ में नहीं लिखा है।

कई अलग-अलग ग्रंथों में पुराणों में लिखा हुआ है। इसीलिए Maa Baglamukhi सिर्फ एक मान्यता नहीं है। मां बगलामुखी एक जीवित परंपरा है जिसको बहुत प्रभावशाली तौर पे हर तरीके के लोग मानते भी हैं, पूजते भी हैं और जाकर दर्शन भी करते हैं। और अब आने वाली है मां बगलामुखी जयंती। वैशाख शुक्ल अष्टमी को मां बगलामुखी जयंती मनाई जाती है। यह सिर्फ एक त्यौहार नहीं है बल्कि यह एक बहुत बड़ा मौका है अपने आप को जानने का। अपनी वाणी, अपनी नियति और अपना आने वाला अच्छा और बुरा समय नियंत्रित करने का।

नकारात्मकता को हराने के लिए मां की जयती के दिन शुभ

इस पूजा का अर्थ ना केवल कोर्ट कचहरी के केसेस से या अपने दुश्मनों से या अपने बुरे वक्त से पार पाने का नहीं है बल्कि यह मौका है उस शक्ति से स्वयं जुड़ने का जो आपके जीवन में आने वाली हर नकारात्मकता हर बाधा को हर दुश्मन को समय रहते आपका नुकसान होने के पहले रोक सकता है। तो सिर्फ त्यौहार के तौर पर इस दिन को मत मनाइए। सिर्फ क्योंकि किसी ने कहा है इसलिए जाकर पूजा करना है नहीं पीला चढ़ाना है क्योंकि बताया गया है नहीं समझिए कि आप क्या कर रहे हैं क्यों कर रहे हैं त्यौहार के तौर पर ना मनाते हुए अपने आप से जुड़ने का बहुत अच्छा मौका है पूजा पाठ से अपने अंदर और अपने बाहर अपने आसपास हर तरीके के

नकारात्मकता को हराने का एक बहुत अच्छा दिन है जयंती के दिन जब मां बगलामुखी की शक्ति आपके साथ होगी ना तो आप आने वाली हर दुविधा, हर दिक्कत, हर परेशानी को ज्यादा स्पष्टता और ज्यादा कॉन्फिडेंस के साथ ज्यादा आत्मविश्वास के साथ उससे लड़ पाएंगे। उससे पार पाएंगे। क्योंकि जब समस्याएं बढ़ती है ना कोर्ट कचहरी की, दूसरी बाधाओं की, नकारात्मकता की, दुश्मनों की तो उस समय सिर्फ आपको आत्मविश्वास नहीं चाहिए होता। आपको सिर्फ पैसे की ताकत से आप नहीं निकल पाते।

12 लाख 25,000 मूल मंत्र जाप भी किया जाएगा

आपको चाहिए होती है एक सच्ची शक्ति जो आपके साथ या आपके पीछे खड़ी रहे कि मैं हूं तू चलता जा तेरे रास्ते में आने वाले सारे अवरोधों को मैं हटा दूंगी उनकी भक्ति से आपको यह शक्ति मिलती है और जैसा कि मैंने आपको बताया कि और इसी शक्ति से जुड़ने का बहुत बड़ा अवसर आ रहा है Maa Baglamukhi जयंती के दिन। क्या-क्या करना होगा इस दिन? क्या-क्या करना ही है इस दिन? तो इस दिन श्री मंदिर द्वारा कई बड़ी महा पूजा होने जा रही है। एक और 36 ब्राह्मणों द्वारा पहली बार 1000 किलो लाल मिर्च से किया जाएगा सबसे बड़ा अग्नि आहुति महायज्ञ। इसके साथ ही बगलामुखी प्रत्यंगिरा कवच अनुष्ठान और 12 लाख 25,000 मूल मंत्र जाप भी किया जाएगा।

Maa Baglamukhi आठवें महाविद्या की स्वरुप

इतने बड़े पैमाने पर किया गया यह यज्ञ आपके शत्रुओं की नकारात्मक शक्तियों को जलाकर आपके जीवन में मां की कृपा और विजय का द्वार खोल सकता है। एक और बड़ी पूजा होगी आठ पहरों में जहां आठ ब्राह्मण आठ दिव्यों से 800 बार मां बगलामुखी का कवच पाठ करेंगे 8000 बार। उनका मंत्र जाप महा पूजा करेंगे जो आपको आठ दिशाओं से आने वाली बाधाओं और नकारात्मक ऊर्जाओं से सुरक्षा दे सकता है। अब आप सोच रहे होंगे कि आठ आठ आठ आठ बोल रहा है यह आदमी आठ का क्या महत्व है? मैंने आपको पहले ही बताया कि 10 महाविदओं में से मां बगलामुखी आठवें महाविद्या की स्वरूप है। इसीलिए जितनी भी चीजें होती हैं आठ के आसपास होती है और रंग चढ़ता है पीला।

इसके साथ ही दतिया के पीतांबरा पीठ में 21 किलो हल्दी से विशेष हवन किया जाएगा जो शत्रु बाधा और नजर दोष को रोकने के लिए अत्यंत प्रभावी माना जाता है। और शास्त्रों के अनुसार जयंती का निश्चित काल सबसे शक्तिशाली समय होता है।

जब हल्दी अभिषेक के माध्यम से मां की आराधना की जाती है ताकि जीवन की रुकावटें वहीं थम जाए। और सबसे महत्वपूर्ण बात कि इन सब चीजों के लिए अब आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं है। मैंने तो बड़े आराम से कह दिया कि नलखेड़ा और दतिया जो कि मध्य प्रदेश में है। एक उत्तर प्रदेश के बॉर्डर में है। एक उज्जैन से 100 कि.मी. दूर है।

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