SC: नई दिल्ली में देश के सर्वोच्च न्यायालय ने सरकारी संस्थानों में वर्षों तक सेवा देने वाले आकस्मिक (Casual) और अंशकालिक (Part-Time) कर्मचारियों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। SC ने स्पष्ट किया कि लंबे समय तक निरंतर सेवा देने वाले कर्मचारियों को केवल इसलिए पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता क्योंकि उनकी नियुक्ति नियमित नहीं थी।
न्यायमूर्ति संजय करोल और ए. जी. मसीह की पीठ ने कहा कि “पेंशन कोई दया या अनुग्रह नहीं, बल्कि संविधान द्वारा संरक्षित एक अर्जित अधिकार है”, जो कर्मचारी अपनी लंबी और निरंतर सेवा के बदले प्राप्त करता है।
SC का यह फैसला उस मामले में आया जिसमें बिहार के एक डाक विभाग कर्मचारी की विधवा ने करीब 18 वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ने के बाद पेंशन का अधिकार हासिल किया। केंद्र सरकार ने अतिरिक्त वित्तीय बोझ का तर्क दिया था, लेकिन SC ने इसे खारिज करते हुए कहा कि वित्तीय सुविधा के आधार पर कर्मचारियों के वैधानिक अधिकार नहीं छीने जा सकते।
अदालत ने यह भी कहा कि सरकार को एक आदर्श नियोक्ता (Model Employer) की भूमिका निभानी चाहिए। यदि कोई कर्मचारी वर्षों तक नियमित कर्मचारियों की तरह समान जिम्मेदारियां निभाता है, तो उसे केवल पदनाम या नियुक्ति की प्रकृति के आधार पर सामाजिक सुरक्षा और पेंशन लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता।
प्रमुख बातें
लंबे समय तक सेवा देने वाले आकस्मिक और अंशकालिक कर्मचारी पेंशन के हकदार हो सकते हैं।
नियमितीकरण (Regularisation) न होने मात्र से पेंशन का अधिकार समाप्त नहीं होगा।
पेंशन को SC ने “संवैधानिक और अर्जित अधिकार” बताया।
सरकार को समान कार्य करने वाले कर्मचारियों के साथ भेदभाव नहीं करने की नसीहत।
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