AYODHYA NEWS:अयोध्या में सागर पटेल की संदिग्ध मौत का मामला मामले के सूत्रधारों के इशारे पर कर रहे जांच । राजर्षि दशरथ स्वशासी चिकित्सा महाविद्यालय में संदिग्ध परिस्थितियों में हुई एमबीबीएस के छात्र सागर पटेल की फांसी लगा लेने से हुई मौत की जांच करने आई दो सदस्यीय टीम की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। जिस प्रकार जांच प्रारंभ होने के साथ ही जांच अधिकारी शिकायतकर्ताओं के साथ घुल-मिल रहे हैं,उनके साथ कार से घूम रहे हैं, उनके इस प्रकार के क्रियाकलापों ने जांच की निष्पक्षता को सन्देह के घेरे में लाकर खड़ा कर दिया है।
न्यायालय ने मामले में पहले पुलिस से रिपोर्ट तलब की
राजर्षि दशरथ मेडिकल कालेज में एमबीबीएस के छात्र जौनपुर निवासी सागर पटेल ने संदिग्ध परिस्थितियों में मेडिकल कालेज में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। सूत्रों के अनुसार इस प्रकरण में मेडिकल कालेज के एक गुट ने सागर पटेल के पिता समर बहादुर पटेल को गुमराह कर मेडिकल कालेज के तत्कालीन प्राचार्य सत्यजीत वर्मा, प्रोफेसर डा. देवाजीत शर्मा व डा. मनीष वर्मा को फंसाने के लिए उनके खिलाफ न्यायालय में आत्महत्या के लिए प्रेरित करने सम्बन्धी मामला दर्ज कराने के लिए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिला दिया। न्यायालय ने मामले में पहले पुलिस से रिपोर्ट तलब की।
न्यायालय में मुकदमा दर्ज कराने के आरोप पूर्व में लगाए गए
इसके बाद महानिदेशक चिकित्सा शिक्षा से जांच कराकर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया। न्यायालय के निर्देश पर महानिदेशक ने सीएमओ अयोध्या को टीम गठित कर जांच कराने का निर्देश दिया। सीएमओ ने जांच के लिए जो टीम गठित की उसने जांच करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद महानिदेशक ने रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज के के प्राचार्य डा. सुनील कुमार कौशल को जांच करने का निर्देश दिया। डा. सुनील कुमार कौशल अपने एक सहयोगी सहायक आचार्य डा.मुकेश कुमार बंसल को साथ लेकर बुधवार को राजर्षि दशरथ मेडिकल कालेज पहुंचे। उन्होंने मामले से सम्बंधित चिकित्सकों व स्टाफ के बयान दर्ज करने प्रारंभ किए।
सूत्रों के अनुसार बांदा से आए प्राचार्य डा.सुनील कुमार कौशल व सहायक आचार्य डाक्टर मुकेश कुमार बंसल की गतिविधियां निष्पक्ष नहीं दिख रहीं हैं। बयान के दौरान जिस प्रकार मेडिकल कॉलेज के एक गुट के चिकित्सक जिन पर सागर पटेल के पिता को गुमराह कर न्यायालय में मुकदमा दर्ज कराने के आरोप पूर्व में लगाए गए थे। वहीं लोग बार बार जांच अधिकारियों से मिल रहे थे। सूत्रों के अनुसार जांच अधिकारी उन्हीं लोगों की कार से अयोध्या भ्रमण करते देखे गए हैं। उनकी इन संदिग्ध गतिविधियों को लेकर सूत्रों का मानना है कि जांच रिपोर्ट निष्पक्ष हो पाएगी इसमें संदेह है।
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