Thursday, November 5, 2026

Govardhan Puja 2026: पूजा में क्या-क्या चढ़ाएं? भूलकर भी मत करना ये 5 गलतियां

Share

Govardhan Puja 2026: गोवर्धन पूजा एक प्रमुख हिंदू त्योहार है, जो दिवाली के ठीक अगले दिन (कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को) मनाया जाता है। इस त्योहार को ‘अन्नकूट’ के नाम से भी जाना जाता है। इस बार गोवर्धन पूजा सोमवार, 9 नवंबर 2026 को है। दिवाली के अगले दिन गोवर्धन पूजा मनाई जाती है। इसे अन्नकूट पूजा भी कहते हैं।

गोवर्धन पूजा में क्या-क्या चढ़ाएं? पूरी लिस्ट

गोवर्धन पूजा में भगवान कृष्ण और गोवर्धन पर्वत की पूजा होती है। इसलिए प्रसाद में ये चीजें जरूर होनी चाहिए:

अन्नकूट का भोग

अन्नकूट मतलब अन्न का पहाड़। इस दिन 56 तरह के पकवान बनाए जाते हैं। अगर 56 नहीं बना सकते तो कम से कम 7 तरह के पकवान जरूर बनाएं – कढ़ी, चावल, रोटी, कद्दू की सब्जी, दाल, बूरा और खीर।

गोवर्धन पर्वत के लिए

गाय के गोबर से घर के आंगन में छोटा गोवर्धन पर्वत बनाएं। उस पर फूल, सिंदूर, अक्षत और दही-चावल चढ़ाएं।

गाय और बछड़े की पूजा

गोवर्धन पूजा गायों के लिए ही है। गाय को गुड़, रोटी और हरा चारा जरूर खिलाएं। गाय के पैर में रोली बांधें।

फूल और तुलसी

भगवान कृष्ण को तुलसी दल, पीले फूल और माखन-मिश्री चढ़ाना सबसे शुभ माना जाता है।

गोवर्धन पूजा की विधि – आसान भाषा में

सुबह जल्दी उठकर नहा लें। आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाएं। उसके बगल में गाय-बछड़े की आकृति बनाएं। फिर धूप-दीप, रोली, अक्षत, फूल से पूजा करें। अंत में अन्नकूट का भोग लगाकर सबको प्रसाद बांटें। शाम को गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा करें।

भूलकर भी मत करना ये 5 गलतियां

  1. गोबर का पर्वत बिना पूजा के तोड़ना: पूजा के बाद अगले दिन ही पर्वत को विसर्जित करें। उसी दिन तोड़ना अशुभ माना जाता है।
  2. गाय को डांटना या मारना: इस दिन गाय को भूलकर भी मत डांटो। गाय में ही लक्ष्मी जी का वास माना जाता है।
  3. बासी खाना चढ़ाना: अन्नकूट में हमेशा ताजा खाना ही चढ़ाएं। बासी भोग भगवान को नहीं लगाया जाता।
  4. . पूजा में लहसुन-प्याज का भोग: अन्नकूट का प्रसाद पूरी तरह सात्विक होना चाहिए। इसमें लहसुन-प्याज नहीं डालते।
  5. पूजा को अधूरा छोड़ना: कई लोग सिर्फ पर्वत बनाकर छोड़ देते हैं। पूजा के बाद परिक्रमा और प्रसाद बांटना भी उतना ही जरूरी है।

निष्कर्ष:

गोवर्धन पूजा सिर्फ पूजा नहीं है, ये प्रकृति और गाय के प्रति धन्यवाद है। जो इस दिन सच्चे मन से अन्नकूट चढ़ाता है, उसके घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।

ये भी पढ़ें- Nahay-Khay 2026: कब है? कद्दू-भात क्यों बनता है? जानिए पूरा नियम और शुभ मुहूर्त

और खबरें

ताजा खबर