Navratri Akhand Jyoti Niyam 2026: शारदीय नवरात्रि 11 अक्टूबर 2026 से शुरू हो रही है। नवरात्रि में अखंड ज्योति का सबसे ज्यादा महत्व होता है। मान्यता है कि 9 दिन तक अखंड ज्योति जलाने से घर में सुख-समृद्धि आती है। लेकिन ज्योति जलाने के कुछ नियम होते हैं, अगर इनका पालन न किया जाए तो व्रत अधूरा माना जाता है। आइए जानते हैं अखंड ज्योति के 5 सबसे जरूरी नियम।
अखंड ज्योति किस दिशा में जलाएं?
वास्तु शास्त्र के अनुसार अखंड ज्योति हमेशा ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में जलानी चाहिए। इस दिशा में ज्योति जलाने से मां दुर्गा की कृपा सबसे ज्यादा मिलती है। भूलकर भी ज्योति को दक्षिण दिशा में न रखें।
घी की ज्योति या तेल की ज्योति? क्या है सही?
- दाहिनी तरफ घी की ज्योति: अगर आपने घी की ज्योति जलाई है तो उसे माता के दाहिनी तरफ रखें। ये सुख-समृद्धि के लिए जलाई जाती है।
- बायीं तरफ तेल की ज्योति: तेल की ज्योति माता के बायीं तरफ रखी जाती है। ये शत्रुओं से रक्षा के लिए होती है।
अगर आप सिर्फ एक ही ज्योति जला रहे हैं तो घी की ज्योति जलाना सबसे शुभ होता है।
ज्योति के लिए कौन सी बाती का प्रयोग करें?
अखंड ज्योति के लिए हमेशा लाल कलावे वाली लंबी बाती का प्रयोग करें। बाती को पहले घी में अच्छे से डुबो लें। 9 दिन तक बाती को बीच में बदलना नहीं चाहिए, इसलिए बाती थोड़ी मोटी और लंबी रखें।
सबसे बड़ा सवाल – अगर अखंड ज्योति बुझ जाए तो क्या होगा?
अगर किसी कारण से नवरात्रि के बीच में ज्योति बुझ जाए तो घबराएं नहीं। इसे अशुभ न समझें।
उपाय: माता से क्षमा मांग कर उसी बाती को घी से फिर से जला दें। ध्यान रखें कि ज्योति को कभी भी फूंक मारकर न बुझाएं। ज्योति के बुझने पर दूसरी बाती लगाने से बचें।
इन 3 गलतियों को कभी न करें
- अखंड ज्योति को जमीन पर न रखें, चौकी या पटरे पर लाल कपड़ा बिछा कर रखें।
- ज्योति जलाने के बाद घर को 9 दिन तक खाली न छोड़ें, घर में कोई न कोई जरूर रहे।
- ज्योति के पास सोएं नहीं और न ही गंदे हाथों से ज्योति को छुएं।
- नवरात्रि में अखंड ज्योति आस्था का प्रतीक है। इन छोटे-छोटे नियमों का ध्यान रखेंगे तो मां दुर्गा की कृपा आपके पूरे परिवार पर बनी रहेगी।

