Sarva Pitru Amavasya 2026 Date: पितृपक्ष का आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण दिन सर्वपितृ अमावस्या होता है। इस साल अमावस्या तिथि को लेकर लोगों में कन्फ्यूजन है कि सर्वपितृ अमावस्या 9 अक्टूबर को है या 10 अक्टूबर को। पंचांग के अनुसार इस बार सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर 2026, शनिवार को मनाई जाएगी।
क्या है सही तिथि
पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि 9 अक्टूबर 2026 को रात 9 बजकर 37 मिनट से शुरू होगी और 10 अक्टूबर को रात 9 बजकर 21 मिनट पर खत्म होगी। उदया तिथि के नियम के अनुसार सूर्योदय के समय जो तिथि होती है वही पूरे दिन मानी जाती है। इसलिए 10 अक्टूबर को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि होने के कारण सर्वपितृ अमावस्या 10 अक्टूबर को ही मनाई जाएगी।
पितृपक्ष 27 सितंबर से शुरू होकर 10 अक्टूबर को खत्म हो रहा है। शास्त्रों में कहा गया है कि इस दिन उन सभी पितरों का श्राद्ध किया जा सकता है जिनकी मृत्यु तिथि याद न हो या किसी कारण से उनका श्राद्ध नहीं हो पाया हो।
सर्वपितृ अमावस्या का शुभ मुहूर्त 2026
इस दिन पितरों का श्राद्ध दोपहर के समय किया जाता है जिसे कुतुप मुहूर्त कहा जाता है।
- कुतुप मुहूर्त: दोपहर 11:50 से 12:35 तक
- रौहिण मुहूर्त: दोपहर 12:35 से 1:20 तक
- अपराह्न काल: दोपहर 1:20 से 3:40 तक
इस समय में तर्पण और पिंडदान करना सबसे फलदायी माना जाता है।
किसका श्राद्ध होता है इस दिन?
- जिनके परिजनों की मृत्यु तिथि याद न हो।
- जिनका श्राद्ध पितृपक्ष में किसी कारण से छूट गया हो।
- अकाल मृत्यु वाले पितरों का भी इस दिन श्राद्ध किया जाता है।
सर्वपितृ अमावस्या पर करें ये 3 अचूक उपाय
- पीपल के पेड़ के नीचे दीपक: इस दिन शाम के समय पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और पितरों के नाम का जल अर्पित करें। मान्यता है कि इससे पितृदोष खत्म होता है।
- ब्राह्मण भोज और दान: इस दिन गरीबों और ब्राह्मणों को भोजन कराना, वस्त्र, तिल और अन्न का दान करना बहुत पुण्यदायी होता है।
- गीता का पाठ: घर में इस दिन गीता के सातवें अध्याय का पाठ करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
इस दिन गलती से भी लहसुन-प्याज, मांस-मदिरा का सेवन न करें और घर में क्लेश से बचें।
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