Monday, October 5, 2026

Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में मृत्यु हो जाए तो क्या होता है? जानें शास्त्रों में क्या लिखा है, पितरों को मिलती है मोक्ष या…

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Pitru Paksha 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल पितृ पक्ष 26 सितंबर 2026 से शुरू हो रहा है और 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या पर खत्म होगा। पितृ पक्ष को पितरों का समय माना जाता है। ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल आता है कि अगर पितृ पक्ष में ही किसी की मृत्यु हो जाए तो क्या होता है? क्या यह शुभ होता है या अशुभ? आइए जानते हैं गरुड़ पुराण और शास्त्रों में इसके बारे में क्या लिखा है।

पितृ पक्ष में मृत्यु होना शुभ या अशुभ?

शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष में मृत्यु होना अशुभ नहीं माना जाता। बल्कि इसे एक तरह से अच्छा माना जाता है। कहा जाता है कि इस दौरान मृत्यु के देवता यमराज पितरों को मुक्त कर देते हैं ताकि वे पृथ्वी पर अपने परिजनों के पास आ सकें। इसलिए इस समय में प्राण त्यागने वाली आत्मा सीधे अपने पितरों के साथ पितृलोक में जाती है।

क्या लिखा है गरुड़ पुराण में

गरुड़ पुराण में भगवान विष्णु ने गरुड़ देव को पितृ पक्ष के महत्व के बारे में बताया था। गरुड़ पुराण के अनुसार, पितृ पक्ष में मरने वाले व्यक्ति की आत्मा को भटकना नहीं पड़ता। पितरों के आशीर्वाद से उसे जल्दी मोक्ष की प्राप्ति होती है और अगले जन्म में उसे पितृ दोष का सामना नहीं करना पड़ता।

क्या मिलता है मोक्ष?

मान्यता है कि पितृ पक्ष में मृत्यु होने पर व्यक्ति को मोक्ष मिल जाता है। क्योंकि इन 16 दिनों में धरती पर पितरों का वास होता है और वे अपनी संतान से तर्पण स्वीकार करते हैं। ऐसे में अगर कोई इस दौरान शरीर छोड़ता है तो पितर स्वयं उसे अपने साथ ले जाते हैं। इसलिए इसे सीधे पितृलोक की प्राप्ति माना गया है।

अगर पितृ पक्ष में मृत्यु हो जाए तो क्या करना चाहिए?

  • उस व्यक्ति का श्राद्ध उसी साल सर्वपितृ अमावस्या (10 अक्टूबर 2026) को करना चाहिए।
  • अगले साल से उसका श्राद्ध पितृ पक्ष में उसी तिथि पर होगा जिस तिथि पर उसकी मृत्यु हुई है।
  • परिवार को 16 दिन तक पिंडदान और तर्पण करना चाहिए ताकि आत्मा को शांति मिले।

निष्कर्ष

तो कुल मिलाकर पितृ पक्ष में मृत्यु होना अशुभ नहीं बल्कि सौभाग्य की बात मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि उस आत्मा को पितरों का साथ और मोक्ष दोनों मिल जाता है। हालांकि सही जानकारी के लिए अपने कुल पुरोहित से सलाह जरूर लें।

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