Monday, September 21, 2026

Shardiya Navratri 2026: इस बार 11 अक्टूबर से शारदीय नवरात्र शुरू, अष्टमी-नवमी एक ही दिन, नोट करें कलश स्थापना मुहूर्त

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Shardiya Navratri 2026: हिंदू धर्म में शारदीय नवरात्र का सबसे बड़ा महत्व है। साल 2026 में मां दुर्गा के भक्तों के लिए अक्टूबर महीना बहुत खास होने वाला है। इस बार शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू हो रहे हैं और इसकी सबसे बड़ी खासियत है कि अष्टमी और नवमी एक ही दिन पड़ रही हैं।

कब से शुरू हैं? शारदीय नवरात्र 2026

पंचांग के अनुसार, 2026 में आश्विन शुक्ल प्रतिपदा 11 अक्टूबर, रविवार को है। इसी दिन से शारदीय नवरात्र की शुरुआत होगी। नवरात्र का समापन 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरे के साथ होगा। इस बार नवरात्र पूरे 9 दिन के ही होंगे, लेकिन तिथियों के घटने-बढ़ने के कारण अष्टमी-नवमी एक साथ आएंगी।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 2026

नवरात्र के पहले दिन कलश स्थापना का विशेष महत्व होता है। बिना शुभ मुहूर्त के कलश स्थापना फलदायी नहीं मानी जाती।

  • घटस्थापना तारीख: 11 अक्टूबर 2026, रविवार
  • शुभ मुहूर्त: सुबह 06:19 बजे से 10:12 बजे तक
  • अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:44 बजे से दोपहर 12:31 बजे तक

कोशिश करें कि इसी मुहूर्त में कलश स्थापना करें।

शारदीय नवरात्र 2026 का पूरा कैलेंडर – अष्टमी, नवमी, दशहरा

  • 11 अक्टूबर 2026 (रविवार) – प्रतिपदा (घटस्थापना, मां शैलपुत्री पूजा)
  • 12 अक्टूबर 2026 (सोमवार) – द्वितीया (मां ब्रह्मचारिणी पूजा)
  • 13 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) – तृतीया (मां चंद्रघंटा पूजा)
  • 14 अक्टूबर 2026 (बुधवार) – चतुर्थी (मां कूष्माण्डा पूजा)
  • 15 अक्टूबर 2026 (गुरुवार) – पंचमी (स्कंदमाता पूजा)
  • 16 अक्टूबर 2026 (शुक्रवार) – षष्ठी (कात्यायनी पूजा)
  • 17 अक्टूबर 2026 (शनिवार) – सप्तमी (कालरात्रि पूजा)
  • 18 अक्टूबर 2026 (रविवार) – दुर्गा अष्टमी / महागौरी पूजा
  • 19 अक्टूबर 2026 (सोमवार) – महानवमी / सिद्धिदात्री पूजा (कन्या पूजन और हवन)
  • 20 अक्टूबर 2026 (मंगलवार) – विजयादशमी (दशहरा और दुर्गा प्रतिमा विसर्जन)

इस बार अष्टमी-नवमी एक ही दिन क्यों?

2026 में अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह शुरू होगी और उसी रात में नवमी तिथि लग जाएगी। इसलिए महाअष्टमी और महानवमी की पूजा एक ही दिन यानी 19 अक्टूबर को होगी। इसी दिन कन्या पूजन भी किया जाएगा।

नवरात्र में मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा करने से सुख-समृद्धि और मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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