Prayagraj News:प्रयागराज में स्वरूप रानी नेहरू (एसआरएन) अस्पताल को एम्स की तर्ज पर विकसित करने की दिशा में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में अस्पताल विस्तार के लिए लीज भूमि पर बने सरकारी आवासों को खाली कराने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्रशासन ने विभिन्न विभागों के 19 अधिकारियों और कर्मचारियों को नोटिस जारी कर आवास खाली करने के निर्देश दिए हैं। कुल 22 सरकारी बंगले अस्पताल विस्तार परियोजना के दायरे में आए हैं।
सरकारी आवासों पर कब्जा के चलते कार्यवाही
प्रशासनिक, पुलिस, शिक्षा और अन्य विभागों के अधिकारियों को आवंटित इन सरकारी आवासों को खाली कराकर अस्पताल के विस्तार के लिए भूमि उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही ऐसे अधिकारियों और कर्मचारियों की सूची भी तैयार की जा रही है, जिनका तबादला प्रयागराज से बाहर हो चुका है लेकिन वे अब तक सरकारी आवासों पर कब्जा बनाए हुए हैं।
सिटी मजिस्ट्रेट विनय कुमार सिंह के अनुसार हाईकोर्ट के आदेश के तहत आवंटियों को निर्धारित समय सीमा में आवास खाली करने के निर्देश दिए गए हैं। आवास खाली होने के बाद पात्र अधिकारियों को प्राथमिकता के आधार पर अन्य सरकारी आवास आवंटित किए जाएंगे।
समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए
अस्पताल परिसर की लीज भूमि की दो चरणों में पैमाइश कराई गई है। पहले चरण में 18,700 वर्गमीटर और दूसरे चरण में 31,314 वर्गमीटर भूमि चिन्हित की गई। इसी क्षेत्र में स्थित 22 सरकारी बंगले अस्पताल विस्तार योजना के लिए अधिग्रहित किए जाने हैं।
एसआरएन अस्पताल के विस्तार कार्य की निगरानी स्वयं इलाहाबाद हाईकोर्ट कर रहा है। न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल की अदालत ने डॉ. अरविंद गुप्ता एवं अन्य की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए जिला प्रशासन को वैकल्पिक आवास की व्यवस्था सुनिश्चित करने और परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पांच अधिकारियों को नए सरकारी आवास आवंटित किए जा चुके हैं। अदालत ने इन अधिकारियों को 48 घंटे के भीतर नए आवासों का कब्जा दिलाने का आदेश दिया, ताकि अस्पताल विस्तार का कार्य शीघ्र शुरू किया जा सके। साथ ही जिलाधिकारी प्रयागराज को नियमित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश भी दिए गए हैं।
आवश्यक भुगतान की व्यवस्था राज्य सरकार करेगी
इस बीच अस्पताल के चिल्ड्रेन विंग में लिफ्ट स्थापना कार्य को लेकर भी हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। यूपी स्टेट इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (UPSIDC) द्वारा धनराशि जारी न होने की जानकारी देने पर अदालत ने स्पष्ट किया कि लिफ्ट का कार्य किसी भी परिस्थिति में नहीं रुकना चाहिए और इसके लिए आवश्यक भुगतान की व्यवस्था राज्य सरकार करेगी।
निर्माण कार्यों में हो रही देरी पर नाराजगी जताते हुए हाईकोर्ट ने संबंधित निगम के प्रबंध निदेशक को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। अदालत के सख्त रुख के बाद माना जा रहा है कि एसआरएन अस्पताल को आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं से लैस कर एम्स स्तर का चिकित्सा संस्थान बनाने की प्रक्रिया अब और तेज होगी।
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