Sunday, July 26, 2026

UP News: बिजली संकट पर सवालों के घेरे में व्यवस्था, अफसरशाही पर उठने लगे सवाल

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UP News: उत्तर प्रदेश में रिकॉर्ड बिजली मांग के बीच एक बार फिर बिजली व्यवस्था और ऊर्जा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे हैं। भीषण गर्मी और लगातार बढ़ती बिजली कटौती से आम जनता परेशान है, जबकि जनप्रतिनिधियों और ऊर्जा विभाग के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज होता दिख रहा है।

प्रदेश में कभी ऐसा दौर था जब मई-जून की गर्मी आते ही बिजली संकट सबसे बड़ी खबर बन जाता था। पीक डिमांड के समय ऊर्जा विभाग और UPPCL के बड़े अधिकारी व्यवस्थाओं से ज्यादा विदेश यात्राओं और दफ्तरों तक सीमित नजर आते थे। हालात बदले जरूर हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर समस्याएं अभी भी खत्म होती नहीं दिख रहीं।

बिजली की रिकॉर्ड मांग

वर्तमान समय में प्रदेश में बिजली की रिकॉर्ड मांग दर्ज की जा रही है, लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि क्या ऊर्जा विभाग और UPPCL ने इसके अनुरूप तैयारी की थी? जनप्रतिनिधि बिजली कटौती को लेकर ऊर्जा मंत्री को पत्र लिख रहे हैं, मगर विभागीय अफसरशाही पर सीधे सवाल उठाने से बचते दिखाई देते हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनावी माहौल में कोई भी जनप्रतिनिधि सीधे अफसरों से टकराव का जोखिम नहीं लेना चाहता।

दूसरी तरफ ऊर्जा मंत्री लगातार जिलों का दौरा कर व्यवस्थाओं की समीक्षा करते दिखाई दे रहे हैं, लेकिन बड़े अधिकारी फील्ड में कम ही नजर आते हैं। भीषण गर्मी के बीच बिजली कर्मियों का मनोबल बढ़ाने और स्थानीय व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के बजाय कई अधिकारी वातानुकूलित दफ्तरों तक सीमित रहने के आरोप झेल रहे हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि पिछले वर्षों में तेजी से नए बिजली कनेक्शन, AC और बिजली आधारित उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन उसी अनुपात में उत्पादन क्षमता, ट्रांसमिशन नेटवर्क और सप्लाई सिस्टम को मजबूत नहीं किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लो-वोल्टेज, ट्रिपिंग और घंटों कटौती की शिकायतें आम हैं।

राजनीतिक और प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर भी सवाल उठ रहे हैं। मुफ्त योजनाओं और चुनावी घोषणाओं के बीच बुनियादी ढांचे, ग्रामीण बिजली व्यवस्था और ट्रांसमिशन नेटवर्क पर अपेक्षित निवेश नहीं होने की चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को अब केवल समीक्षा बैठकों से आगे बढ़कर जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ानी होगी। प्रभारी मंत्रियों, वरिष्ठ अधिकारियों और तकनीकी टीमों को जिलों और ब्लॉक स्तर पर जाकर वास्तविक स्थिति का आकलन करना होगा।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि:

  1. क्या बढ़ती बिजली मांग के अनुरूप उत्पादन क्षमता बढ़ाई गई?
  2. क्या ट्रांसमिशन सिस्टम भीषण गर्मी और रिकॉर्ड लोड झेलने के लिए तैयार है?
  3. क्या ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की जरूरतों के हिसाब से इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हुआ?
  4. क्या भविष्य की बिजली जरूरतों को लेकर दीर्घकालिक योजना बनाई गई है?
  5. अब बिजली केवल सुविधा नहीं, बल्कि आम जनजीवन की सबसे जरूरी आवश्यकता बन चुकी है।

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