Uttar Pradesh: बालिकाओं से जुड़े गंभीर आरोपों में घिरे एक अधिकारी को लेकर नया मोड़ सामने आया है। सूत्रों के अनुसार, उक्त अधिकारी अब अपने खिलाफ दर्ज प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) को निरस्त कराने के लिए उच्च न्यायालय की शरण में पहुंचा है।
गौरतलब है कि इस अधिकारी पर पूर्व में बालिकाओं से देह व्यापार करवाने जैसे संगीन आरोपों में निलंबन की कार्रवाई हो चुकी है। इसके बाद बाल गृह (बालिका) में निरुद्ध बच्चियों के साथ यौन शोषण के आरोप भी सामने आए, जिन पर मंडलायुक्त द्वारा निलंबन की संस्तुति शासन को भेजी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए भ्रष्टाचार निवारण न्यायालय द्वारा एफआईआर दर्ज करने के आदेश भी दिए गए थे।
अब जानकारी मिल रही है कि संबंधित अधिकारी अपने प्रभाव और संसाधनों का उपयोग करते हुए उच्च न्यायालय में एफआईआर को खत्म (निरस्त) करवाने की कोशिश में लगा हुआ है। इस घटनाक्रम ने एक बार फिर प्रशासनिक पारदर्शिता और न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद अधिकारी कानूनी प्रक्रिया से बचने में सफल होता है, तो यह न केवल न्याय व्यवस्था के लिए चुनौती होगी, बल्कि बाल संरक्षण तंत्र की विश्वसनीयता पर भी गहरा असर डालेगा।
मामले को लेकर जनपद में आक्रोश का माहौल है और लोग निष्पक्ष जांच तथा कठोर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि दोषियों को सजा मिल सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
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