Janmashtami 2026: भगवान श्रीकृष्ण के भक्तों के लिए बड़ी खुशखबरी है। इस साल कृष्ण जन्माष्टमी पर 15 साल बाद वो दुर्लभ महासंयोग बनने जा रहा है जिसका इंतजार हर भक्त को रहता है। साल 2026 में जन्माष्टमी 4 सितंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी और इस दिन वही रोहिणी नक्षत्र रहेगा जिसमें भगवान कृष्ण का जन्म हुआ था। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार ऐसा शुभ संयोग आखिरी बार 2011 में बना था। इसी वजह से इस बार की जन्माष्टमी को महा-जन्माष्टमी भी कहा जा रहा है। इसलिए इस बार की जन्माष्टमी को बेहद शुभ और फलदायी माना जा रहा है।
क्यों खास है ये महासंयोग?
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि में हुआ था। अक्सर ऐसा होता है कि जन्माष्टमी के दिन अष्टमी तिथि तो होती है लेकिन रोहिणी नक्षत्र अगले दिन आ जाता है।
इस साल 4 सितंबर को अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र दोनों एक साथ मध्यरात्रि में मौजूद रहेंगे। इसी कारण इसे जयन्ती योग भी कहा जा रहा है। इस योग में पूजा करने से व्रत का दोगुना फल मिलता है।
जन्माष्टमी 2026 शुभ मुहूर्त
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 4 सितंबर 2026, दोपहर 12:15 बजे से
अष्टमी तिथि समाप्त: 5 सितंबर 2026, दोपहर 01:30 बजे तक
रोहिणी नक्षत्र प्रारंभ: 4 सितंबर शाम 05:30 बजे से
रोहिणी नक्षत्र समाप्त: 5 सितंबर सुबह 06:45 बजे तक
निशिता पूजा मुहूर्त (मुख्य पूजन का समय): रात 12:05 बजे से 12:51 बजे तक (5 सितंबर)
यही समय भगवान के जन्म का सबसे शुभ मुहूर्त है।
व्रत पारण का समय: 5 सितंबर सुबह 08:15 बजे के बाद
निशिता पूजा का समय ही लड्डू गोपाल की पूजा का मुख्य मुहूर्त है। इसी समय बाल गोपाल का जन्म होगा।
पूजन विधि
- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर व्रत का संकल्प लें।
- दिन भर फलाहार व्रत रखें।
- मध्यरात्रि में बाल गोपाल की मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से स्नान कराएं।
- नए वस्त्र पहनाकर, मोर पंख और माखन-मिश्री का भोग लगाएं।
- “ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का 108 बार जाप करें।
- इस महासंयोग में सच्चे मन से पूजा करने पर संतान सुख और मनोकामना पूर्ति होती है।
जन्माष्टमी पर इन बातों का रखें ध्यान
- व्रत का ध्यान:
व्रत में अनाज, सामान्य नमक और लहसुन-प्याज बिल्कुल न खाएं। सेंधा नमक, फल, दूध और मखाने ले सकते हैं। इस दिन झूठ बोलने और क्रोध करने से बचें।
- पूजा का ध्यान:
- लड्डू गोपाल को अकेला न छोड़ें, उन्हें झूले में झुलाते रहें।
- काले कपड़े पहनकर पूजा न करें, पीले या लाल कपड़े शुभ होते हैं।
- भोग में तुलसी का पत्ता जरूर रखें, तुलसी के बिना भोग अधूरा माना जाता है।
- रात 12 बजे जन्म से पहले लड्डू गोपाल को सुलाएं नहीं।
- घर का ध्यान:
- घर को साफ-सुथरा रखें।
- रात में घर में अंधेरा न रखें, दीपक जलाकर रखें।
- किसी का अपमान न करें और गरीबों को दान जरूर करें।
- सबसे बड़ी गलती:
बहुत से लोग जन्म होते ही व्रत खोलकर खाना खा लेते हैं। व्रत का पारण हमेशा अगले दिन सुबह 8:15 बजे के बाद ही करना चाहिए।
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