Sunday, September 6, 2026

Hartalika Teej 2026: 13 या 14 सितंबर कब रखा जाएगा हरतालिका तीज का व्रत, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और कथा

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Hartalika Teej 2026: हर साल भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हरतालिका तीज मनाई जाती है। हिंदू धर्म में इस व्रत का बहुत महत्व है। मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से पति की उम्र लंबी होती है और वैवाहिक जीवन में कभी कोई बाधा नहीं आती। कुंवारी लड़कियां इस व्रत को अच्छे पति की कामना के लिए रखती हैं।

कब है हरतालिका तीज?

द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल तृतीया तिथि 13 सितंबर 2026 रविवार को सुबह 7 बजकर 8 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन 14 सितंबर सोमवार को सुबह 7 बजकर 6 मिनट पर खत्म होगी। उदया तिथि के हिसाब से हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026, सोमवार को ही रखा जाएगा। इस दिन सोमवार होने से इसका महत्व और भी बढ़ गया है क्योंकि सोमवार भगवान शिव का दिन होता है।

पूजा का शुभ मुहूर्त

इस साल हरतालिका तीज पर पूजा के लिए 2 शुभ मुहूर्त मिल रहे हैं।1. प्रातः काल मुहूर्त: सुबह 06:05 बजे से 07:06 बजे तक – यह सबसे उत्तम मुहूर्त है। कोशिश करें कि इसी समय में पूजा कर लें।
2. प्रदोष काल मुहूर्त: शाम 06:28 बजे से रात 08:47 बजे तक। अगर आप सुबह पूजा न कर पाएं तो इस मुहूर्त में पूजा कर सकती हैं।
3. ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:32 बजे से 05:19 बजे तक
4. अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक इस दिन रवि योग भी बन रहा है जो सुबह 06:06 से दोपहर 03:21 तक रहेगा। इस योग में की गई पूजा का फल दोगुना मिलता है।

हरतालिका तीज की पूजा विधि

  1. संकल्प: सुबह जल्दी उठकर स्नान करें, साफ और सुंदर वस्त्र पहनें, सोलह श्रृंगार करें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
  2. मूर्ति बनाना: रेत, काली मिट्टी या बालू से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की मूर्ति अपने हाथों से बनाएं। बाजार की मूर्ति से ज्यादा फल मिट्टी की मूर्ति की पूजा से मिलता है।
  3. सजावट: एक लकड़ी की चौकी पर केले के पत्ते बिछाएं, उस पर मूर्तियों को स्थापित करें। कलश स्थापित करें और दीप जलाएं।
  4. पूजन सामग्री: माता पार्वती को सिंदूर, बिंदी, मेहंदी, चूड़ियां, बिछिया और नई साड़ी चढ़ाएं। शिव जी को बेलपत्र, भांग, धतूरा, सफेद फूल चढ़ाएं।
  5. कथा और जागरण: इसके बाद हरतालिका तीज की व्रत कथा सुनें। कथा सुने बिना व्रत अधूरा माना जाता है। रात में सोना नहीं चाहिए, जागकर भजन-कीर्तन करना चाहिए।
  6. पारण: अगले दिन 15 सितंबर को सुबह स्नान के बाद पूजा करके माता पार्वती को सिंदूर अर्पित करके व्रत का पारण करें।

हरतालिका तीज की व्रत कथा

कथा के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। उनके पिता हिमालय ने उनका विवाह भगवान विष्णु से तय कर दिया था, तब उनकी सखियों ने उनका हरण करके जंगल में ले गईं। वहां माता पार्वती ने रेत के शिवलिंग बनाकर तपस्या की और शिव जी प्रसन्न होकर उन्हें वरदान दिया। इसलिए इस व्रत को हरत + आलिका = सखी द्वारा हरण करने वाली तीज कहा जाता है।

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