मथुरा की गलियों से मुंबई की हांडियों तक, जन्माष्टमी पर इन 5 शहरों में उतरता है पूरा ब्रज!

मथुरा की गलियों से मुंबई की हांडियों तक, जन्माष्टमी पर इन 5 शहरों में उतरता है पूरा ब्रज!

जन्माष्टमी पर अगर आपको कृष्ण भक्ति का असली जादू देखना है तो सिर्फ घर पर पूजा करके मत रह जाइए। इस दिन भारत के कुछ शहर तो सच में मिनी ब्रज बन जाते हैं।

यहां हर गली, हर मंदिर और हर चौराहे पर सिर्फ "हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की" की गूंज सुनाई देती है।

अगर जन्मभूमि मथुरा है तो कर्मभूमि द्वारका है। गुजरात के इस शहर में द्वारकाधीश मंदिर को सोने और फूलों से सजाया जाता है। 

यहां जन्माष्टमी पर 56 भोग का विशेष आयोजन होता है। समुद्र किनारे बसे इस मंदिर में जन्मोत्सव का नजारा बहुत ही शांत और दिव्य होता है।

मथुरा से 15 किलोमीटर दूर वृंदावन में जन्माष्टमी 10 दिन तक मनाई जाती है। यहां बांके बिहारी मंदिर, प्रेम मंदिर और इस्कॉन मंदिर की सजावट ऐसी होती है 

कि आंखें खुली रह जाती हैं। प्रेम मंदिर की लाइटिंग तो पूरी रात जलती है। यहां की फूलों की होली और रासलीला आपको कहीं और नहीं मिलेगी।

बहुत कम लोग जानते हैं कि पुरी में कृष्ण को जगन्नाथ जी के रूप में पूजा जाता है। जन्माष्टमी पर यहां जगन्नाथ मंदिर में कृष्ण जन्म लीला होती है 

और आधी रात को विशेष पूजा की जाती है। यहां का माहौल मथुरा से बिल्कुल अलग, लेकिन उतना ही दिव्य होता है।

मुंबई की जन्माष्टमी मतलब हाई-वोल्टेज जोश! यहां की दही-हांडी वर्ल्ड फेमस है। दादर, घाटकोपर, वर्ली और बोरीवली में गोविंदा पथक 40-50 फीट ऊंची