Janmashtami 2026: जन्माष्टमी की रात का इंतजार हर कृष्ण भक्त को होता है। रात 12 बजे जैसे ही कान्हा का जन्म होता है, शंख, घंटी और कृष्ण जन्म की बधाई से पूरा माहौल गूंज उठता है। लेकिन क्या आपने कभी नोटिस किया है कि ठीक 12 बजे के बाद कई बड़े-बुजुर्ग घर की खिड़कियां और मुख्य दरवाजा कुछ देर के लिए खोल देते हैं? कई लोग इसे टोटका समझते हैं, लेकिन इसके पीछे 3 बड़े धार्मिक कारण हैं।
भगवान का घर में प्रवेश
भगवद् पुराण के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मथुरा में कारागार के बंद दरवाजों के अंदर हुआ था, लेकिन जन्म लेते ही सारे दरवाजे अपने आप खुल गए थे। इसी लीला को प्रतीक मानकर आज भी भक्त अपने घर के दरवाजे खोलते हैं। मान्यता है कि मध्यरात्रि में भगवान कृष्ण हर घर में प्रवेश करते हैं। अगर दरवाजे बंद हों तो भगवान लौट जाते हैं। इसलिए 12 बजे जन्म आरती के बाद 10-15 मिनट के लिए घर का मुख्य द्वार और बालकनी की खिड़कियां खोल दी जाती हैं ताकि कान्हा का स्वागत किया जा सके।
जन्म के चंद्रमा की रोशनी
जन्माष्टमी की रात को जो चंद्रमा निकलता है, उसे बहुत ही चमत्कारी माना जाता है। इसे जन्म चंद्रमा या रोहिणी चंद्रमा कहते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस चंद्रमा की रोशनी में अमृत होता है। पुरानी परंपरा है कि जन्म के बाद लड्डू गोपाल को इस चंद्रमा के दर्शन कराए जाते हैं और उसकी रोशनी में उनका पंचामृत स्नान कराया जाता है। खिड़कियां खोलने से ये चंद्रमा की रोशनी सीधे ठाकुर जी पर और घर के अंदर आती है, जिससे घर का चंद्र दोष, मानसिक तनाव और नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है।
माता लक्ष्मी का आगमन
एक मान्यता ये भी है कि जन्माष्टमी की रात भगवान कृष्ण के साथ-साथ माता लक्ष्मी भी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं। जिस घर के दरवाजे-खिड़कियां खुले होते हैं और जहां भजन-कीर्तन हो रहा होता है, वहां लक्ष्मी जी प्रवेश करती हैं। बंद घर को वो अभागा मानकर छोड़ देती हैं। इसलिए जन्म के बाद घर खोलना समृद्धि और बरकत को अंदर बुलाने जैसा माना जाता है।
क्या करें 12 बजे के बाद?
जन्म आरती के बाद दरवाजा-खिड़की 15 मिनट के लिए खोल दें, घर की लाइटें जला दें, शंख बजाएं और “नंद घर आनंद भयो” का जयकारा लगाएं। इसके बाद प्रसाद वितरण करें।
ये भी पढ़ें- Janmashtami 2026: पहली बार घर ला रहे हैं लड्डू गोपाल? भूलकर भी न करें ये 5 गलतियां, नोट कर लें सही नियम

