प्रेमानंद महाराज से भक्त हर अपनी समस्या का समाधान पुछने जाते है.
हर सवाल का जवाब बड़ी सरलता से देते है। और भक्त उनकी बात सुन अनुसरण भी करते है..
ऐसे में एक भक्त ने उनसे सवाल पूछा की तीर्थ यात्रा करना क्यों जरूरी है. जब कण-कण में भगवान है।
सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि मेंहदी में लालिमा होती है लेकिन पेंड को चीरों तो कहीं भी लाल नहीं होता
ठीक उसी प्रकार तीर्थ अध्यात्म की शक्ति है।
जैसे गंगा जी में स्नान करके बहुत अच्छा लगता है लेकिन उसे मैला करोगें तो अनुभव अच्छा नहीं होगा
अगर गंगा जी में स्नान करने जा रहे तो साष्टांग प्रणाम करें, गंगा जी का जल मंथे पर लगाव फिर 5-7 डूबकी लगाओं. अच्छा अनुभव होगा.
ये परम पवित्र स्थान इस लिए बनाए गए है क्योंकि हमसे जो गलतिया हुई है और पाप हुएं है सभी नष्ट हो जाएं।
महाराज जी ने कहा कि इन तीर्थों को इसलिए बनाया गया है कि हमारे सभी कर्म पवित्र हो जाए