VEDA:December 2025:संस्कृत में लिखे गये हिंदू धर्म के आधार सबसे प्राचीन और पवित्र ग्रंथ वेदों की रचना ऋषि मुनियों द्वारा की गई है। वेदों में ईश्वर, चिकित्सा, गणित, ज्योतिष के साथ अन्य कई विषयों का ज्ञान समाहित है। माना जाता है कि यह ज्ञान ईश्वर द्वारा ऋषि मुनियों को दिये जाते थे और ऋषि मुनियों ने उस ज्ञान को वेदों में वर्णित किया है।

ऋग्वेद में है, देवी देवताओं का आह्रान करने के लिये मंत्रः
वेदों में सबसे प्राचीन वेद ऋग्वेद में 10 मण्डल, 1028 सुक्त और देवताओं को प्रसन्न करने के लिये लगभग 11 हजार मंत्र है। ऋग्वेद में संपूर्ण ब्रह्मांड की उत्पत्ति से सबंधित ज्ञान है। देवी देवताओं का आह्रान करने के लिये इसमें वर्णित मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। शुक्ल और कृष्ण दो भागों में विभाजित यर्जुवेद में विभिन्न यज्ञों के संबधित मंत्र है। तीसरा वेद सामवेद है इसमें मंत्र संगीत के रुप में वर्णित है। चौथा वेद अथर्ववेद चिकित्सा और विज्ञान का वेद है।
देवव्रत महेश रेखे बने वेदमूर्तिः
महाराष्ट्र के अहिल्यानगर के छोटे से गांव के ब्राह्मण परिवार में जन्में वेदमूर्ति देवव्रत महेश रेखे ने पाँच वर्ष की आयु से ही देवमंत्रों का उच्चारण शुरु कर दिया था। सांगवाद विश्वविद्यालय के छात्र देवव्रत महेश रेखे ने यर्जुवेद के 2000 मंत्रों का 50 दिनों तक बिना रुके दण्ड कर्म पारायणम् करके वेदों का ज्ञान प्राप्त कर वेदमूर्ति बने।

यर्जुवेद के मंत्रों का कठिन दण्ड कर्म पारायणम्
200 वर्ष पहले नासिक के नरायण शास्त्री देव ने वेदमूर्ति बने थे। भारतीय संस्कृति को भक्ति से जोड़ कर देवव्रत महेश रेखे का मात्र 19 वर्ष की आयु में किया गया यर्जुवेद के मंत्रों का दण्ड कर्म पारायणम् अपने आप में एक अविश्वसनीय कृत है। दण्ड कर्म पारायणम् में एक विशेष विधि से मंत्रों का उच्चारित किया जाता है। इसमें पाठों को सीधे और उल्टा करके पढ़ते है। देवव्रत महेश रेखे द्वारा इतनी कम उम्र में यर्जुवेद के मंत्रों का इतना कठिन विधि के पाठ ने विद्वानों को भी आश्चर्यचकित कर दिया है।

