UP NEWS:रायबरेली में अंतराष्ट्रीय श्रीमदभगवदगीता जयंती समारोह – 2025 के उपलक्ष्य में मातृभूमि सेवा मिशन द्वारा आयोजित अठारह दिवसीय कार्यक्रम के चतुर्थ दिवस श्रीमदभगवदगीता में निष्काम कर्म विषय पर गीता सेवा संवाद कार्यक्रम का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का शुभारम्भ गीता श्लोकोच्चारण के साथ अतिथियों द्वारा भारतमाता एवं योगेश्वर भगवान श्रीकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण, पुष्पार्चन एवं दीप प्रज्ज्वलन से हुआ।
सनातन परंपरा में कर्म का विशेष महत्व
कार्यक्रम के अति विशिष्ट अतिथि मानव सेवा संस्थान, रायबरेली उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष महेन्द्र अग्रवाल को मातृभूमि सेवा मिशन के संस्थापक डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने समाजसेवा में विशेष योगदान के लिए सम्मानित किया। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए डा. श्रीप्रकाश मिश्र ने कहा हमारे जीवन का प्रत्येक क्षण कर्म से बंधा हुआ है। सुबह उठने से लेकर रात सोने तक, हम अनगिनत क्रियाएँ करते हैं। सनातन परंपरा में कर्म का विशेष महत्व है।
लेकिन अक्सर हम अपने कर्मों के फल से इतनी गहराई से जुड़ जाते हैं कि जब परिणाम हमारी आशाओं के अनुरूप नहीं होते, तो दुःख, चिंता और निराशा हमें घेर लेती है। यही वह स्थान है जहाँ भगवान कृष्ण का गीता में दिया गया निष्काम कर्म का उपदेश अत्यंत प्रासंगिक हो जाता है।श्रीमद्भागवत में निष्काम सेवा का अर्थ है बिना किसी फल या स्वार्थ की इच्छा के भगवान या उनके भक्तों की सेवा करना।
बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये
यह एक निःस्वार्थ कर्म है जो जीवन को समृद्ध बनाता है और सेवा करने वाले को श्रेष्ठ बनाता है। निष्काम सेवा का मूल सिद्धांत यह है कि व्यक्ति को कर्म करना चाहिए, लेकिन उसके परिणाम की चिंता नहीं करनी चाहिए। सेवा के बदले कुछ भी पाने की आशा नहीं रखनी चाहिए। सेवा को मनुष्य के सबसे बड़े गुणों में से एक माना गया है, जो उसे अन्य प्राणियों से ऊंचा उठाता है। कार्यक्रम में पंच कैलाशी रामप्रकाश श्रीवास्तव, राकेश जैन एवं नवीन चंद बतौर अतीविशिष्ट उद्बोधन दिया। कार्यक्रम में मातृभूमि शिक्षा मंदिर के बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किये। सभी अतिथियों को मातृभूमि सेवा मिशन की ओर से स्मृति चिन्ह एवं अंगवस्त्र भेंट किया गया। कार्यक्रम का समापन शांतिपाठ से हुआ।
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