UP News: लखनऊ में साइबर धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया है, जिसमें जालसाजो ने एक सेवानिवृत्त शिक्षक और एक रेलवे अधिकारी को एटीएस और स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) का डर दिखाकर ठग लिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर ₹2.50 लाख जमा कर लिए हैं और जालसाजो की तलाश कर रही है। आरोपियों ने पीड़ितों पर अवैध गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाकर उन्हें धमकाया था।
मामले की जांच चल रही
साइबर क्राइम पुलिस ने राजाजीपुरम निवासी गया प्रसाद त्रिपाठी के मामले की जांच शुरू कर दी है, जिनसे एटीएस इंस्पेक्टर बनकर किसी ने ₹12.57 लाख की ठगी की थी। मामला दर्ज करने के बाद, पुलिस ने ₹2.50 लाख जमा कर लिए हैं और इंटरनेट प्रोटोकॉल (आईपी) एड्रेस का इस्तेमाल करके जालसाजों की तलाश जारी रखे हुए है। पुलिस ने आलमबाग निवासी सेवानिवृत्त रेलवे अधिकारी तेज बहादुर सिंह के मामले में भी अहम सबूत बरामद किए हैं, जिनसे दो किश्तों में ₹18 लाख की ठगी की गई थी। इस जानकारी के आधार पर वे जानकारी जुटा रहे हैं।
प्रसाद त्रिपाठी ने बताया
साइबर क्राइम थाने में दर्ज कराई गई शिकायत में गया प्रसाद त्रिपाठी ने बताया कि 7 नवंबर को उन्हें एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस लखनऊ मुख्यालय में तैनात इंस्पेक्टर बताया। उसने पीड़ित को बताया कि उसके पाकिस्तान से अवैध संबंध हैं। दिल्ली निवासी अफजल खान ने दावा किया कि पाकिस्तानियों के पास उसका मोबाइल नंबर है।
इसके बाद जालसाज ने उन्हें बातों में उलझाकर गिरफ्तार करने की धमकी दी और फिर पुलिस कार्रवाई से बचाने का झांसा देकर उनके खाते से ₹12.57 लाख की ठगी कर ली। इंस्पेक्टर ब्रजेश यादव ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर ठगी की गई ₹2.50 लाख की रकम फ्रीज कर दी गई है। जालसाजों की तलाश की जा रही है।
पीड़ितों ने सुनाई अपनी कहानी
इसी तरह, आलमबाग निवासी सेवानिवृत्त रेलवे अधिकारी तेज बहादुर सिंह को 9 नवंबर को एक अनजान नंबर से साइबर जालसाजों ने कॉल किया। जालसाज ने खुद को सूचना विभाग से बताया। उसने दावा किया कि उसके खाते से आधार कार्ड बनाया गया है, जिससे आतंकवादियों के साथ बड़ी रकम की लेन-देन हुई है। फिर उसने उसे बताया कि उसे एटीएस से कॉल आएगी और उससे बात करने को कहा। उसने उसे कॉल उठाने से पहले एटीएस का लोगो जरूर देखने की सलाह दी। कुछ देर बाद, एटीएस के लोगो वाले एक नंबर से कॉल आया।
कॉल करने वाले ने उस पर आतंकवादियों से संबंध रखने का आरोप लगाया और दावा किया कि जम्मू-कश्मीर में उसके खिलाफ एक मामला दर्ज किया गया है। उसे इस मामले की जानकारी किसी और को देने से भी मना किया गया। धोखेबाजों ने धमकी देकर उसे डिजिटल रूप से गिरफ्तार कर लिया और फिर दो बार में ₹18 लाख की रकम ट्रांसफर कर ली।
जालसाजो ने उन्हें गिरफ़्तारी से जुड़े जाली दस्तावेज भी दिखाए। ठगे जाने का एहसास होने पर उन्होंने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई। इंस्पेक्टर ब्रजेश यादव का कहना है कि जिन खातों में लेन-देन हुआ है, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। बैंक से भी जानकारी मांगी गई है। इसके आधार पर जालसाजों की तलाश जारी है।
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