UP News: ‘‘सुनिये कथा रघुनाथ की’’ के आध्यात्मिक अनुष्ठान के तीसरे दिन बद्रीनाथ धाम के सरस रामकथा प्रवाचक गोविन्द भाई ने रामजन्म की कथा का वर्णन किया। उन्होनें मनु-सतरूपा द्वारा किये गये कठोर व्रत के क्रम में कहा कि भक्त कभी अपने भगवान को दोष नहीं देता। भक्त सदैव अपने और अपनी साधना में दोष खोजने का प्रयास करता है। भक्त का सदैव यही भाव रहता है कि उसकी साधना में कोई कमी है, इसीलिए प्रभु प्रसन्न नहीं होते। मनु-सतरूपा ने कठोर तपस्या की, तब जाकर भगवान प्रसन्न हुए।
मनु-सतरूपा र्निगुण निराकार ब्रह्म के सगुण साकार रूप में दर्शन करना चाहते थे, इनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान ने वरदान मांगने के लिए कहा। मनु महराज ने निवेदन किया कि भगवान शिव के हृदय में आपका जो रूप सदैव विराजमान रहता है, उसी रूप में आप हमंे पुत्ररूप में प्राप्त हों। भगवान ने वरदान दिया और अगले जन्म में राजा दशरथ के घर में भगवान शिव के ईष्ट राम के रूप में प्रकट हुए।
सनातन धर्म सदैव विश्व के कल्याण
गोविन्द भाई ने कहा कि सनातन धर्म सदैव विश्व के कल्याण की कामना करता है। सनातन धर्म का ध्येय ही है ‘‘सर्वे भवन्तु सुखिनः-सर्वे सन्तु निरामयः’’। सनातन धर्म मानने वालों को कुटिल और कपटी व्यक्ति की संगत नहीं करनी चाहिए, क्योंकि कुटिल और कपटी व्यक्ति का साथ जीवन को नर्क बना देता है, जैसे राजा प्रताप भानु को जीवन में कपटी गुरू ने किया। ब्राहम्णों के श्राप से राजा प्रताप भानु रावण के रूप में पैदा हुआ।
इस अवसर पर पूर्व विधायक राकेश सिंह, शेखर शुक्ला एडवोकेट, विवेक मिश्रा ‘पल्लू’, राजन दीक्षित, सूरज शुक्ला, आनन्द शुक्ला, महेन्द्र अग्रवाल, आशीष पाठक, राकेश गुप्ता आदि गण्यमान लोग उपस्थित रहे।
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