लखनऊ: 07 अप्रैल, 2026
Road Transport Corporation: परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री जी की अध्यक्षता में आज हुई कैबिनेट बैठक में परिवहन निगम के तीन प्रस्तावों पर कैबिनेट ने अपनी सहमति प्रदान की। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक निजी सहभागिता (पीपीपी) पद्धति पर उ0प्र0 राज्य सड़क परिवहन निगम के 49 बस स्टेशनों को विकसित करने के संबंध में प्रस्ताव पर सहमति प्राप्त हुई। इन बस स्टेशनों को डिबीएफओटी मॉडल पर विकसित किया जाएगा। उन्होने बताया कि जनपद बुलंदशहर के नरौरा, जनपद बलरामपुर की तहसील तुलसीपुर में एवं जनपद हाथरस की तहसील सिकंद्राराऊ में बस स्टेशन निर्माण हेतु निःशुल्क भूमि, उपलब्ध कराने के प्रस्ताव को भी कैबिनेट ने अपनी सहमति प्रदान की है।
सिनेमाघर इत्यादि उपलब्ध होगी
परिवहन मंत्री ने बताया कि यूपीएसआरटीसी द्वारा पीपीपी मॉडल पर विकसित किए जा रहे बस स्टेशनों के द्वितीय चरण में 49 बस स्टेशनों को विकसित किया जाएगा। इन बस स्टेशनों पर यात्रियों को अत्याधुनिक सुविधाएं जैसे- शॉपिंग मॉल, सिनेमाघर इत्यादि उपलब्ध होगी।
निवेशकों की तकनीकी क्षमता की शर्त को 150 प्रतिशत से घटाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है तथा पात्र परियोजनाओं में निवेशकों की अर्हता की समय सीमा 05 वर्ष से बढ़ाकर 08 वर्ष कर दी गई है। बनने वाले बस स्टेशनों पर फ्लोर एरिया रेशियो (एफ0ए0आर) निवेशकों को प्रोत्साहित करने के लिए सभी प्रस्तावित स्थलों पर 2.5 के समान फ्लोर एरिया रेशियो (एफ0ए0आर) और ग्राउण्ड कवरेज की निःशुल्क अनुमति प्रदान की जाएगी। लीज अवधि समाप्त होने पर यदि विकास कर्ता स्वामित्व वापस नहीं करता है तो भूमि का स्वामित्व स्वतः ही परिवहन निगम को प्राप्त हो जाएगा।
परिवहन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित की जाएगी
परिवहन मंत्री ने बताया कि बुलंदशहर में बनने वाले बस डिपों पूर्व में एनपीसीआईएल की लीज भूमि पर संचालित की जा रही थी, जिसकी लीज अवधि समाप्त हो गई है। बुलंदशहर के नरौरा में सिंचाई विभाग की 1.12 हेक्टेयर भूमि हस्तांतरित की जाएगी। देवीपाटन मंदिर के समीप यात्रियों की सुविधा हेतु एक व्यवस्थित बस स्टेशन की मांग की जा रही थी, जिसके दृष्टिगत बलरामपुर की तहसील तुलसीपुर लोक निर्माण विभाग की 02 हेक्टेयर भूमि परिवहन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित की जाएगी।
जनपद हाथरस के सिकंद्राराऊ में ग्राम रतनपुर, हुसैनपुर में 10.012 हेक्टेयर भूमि परिवहन विभाग को निःशुल्क हस्तांतरित की जाएगी। इन डिपों को आर्थिक केन्द्र (दुकानें, फूट कोर्ट) के रूप में विकसित किया जाएगा जिससे यात्रियों को सुलभ, सस्ती और सुरक्षित परिवहन सुविधा मिलेगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। व्यवसायिक गतिविधियों के माध्यम से परिवहन निगम के राजस्व में वृद्धि होगी।
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