pahalgam attack: फड़फड़ाती नसें, नसों में बहता गर्म लावा, घर में घुसकर मारेंगे जैसे जुमलें सब सुनते हैं जब भी कोई बड़ी घटना होती है…
पहलगाम हमले के बाद भी ऐसे ही भाषण अपनी सुविधानुसार बोले गए गए मगर जो वादे किए गए थे उन्हें पूरा होने का इंतज़ार आज भी है…
परिवार भुखमरी की कगार पर है…सरकारी मदद फाइलों से आगे बढ़ ही नहीं रही है।
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