Monday, January 26, 2026

Magh Mela 2026: आस्था की डुबकी संगम तट से होगी शुरू, नोट कर लें सभी पवित्र स्नान की तारीखें

Share

Magh Mela 2026: माघ मेला एक बड़ा और पुराना आध्यात्मिक मेला है जो हर साल उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में पवित्र त्रिवेणी संगम (गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती) पर लगता है। इसे हिंदू धर्म के सबसे पवित्र आयोजनों में से एक माना जाता है। संगम के किनारे हर साल लगने वाला माघ मेला बहुत खास होता है। इसे सबसे आध्यात्मिक मेलों में से एक माना जाता है, यह पूरे एक महीने तक चलता है। यह मेला लाखों भक्तों की आस्था का प्रतीक है। इसे तपस्या, ध्यान, संयम और जागृति का एक बड़ा त्योहार माना जाता है। आइए जानते हैं कि 2026 में माघ मेला कब शुरू होगा, यह कब तक चलेगा और पवित्र स्नान की तारीखें क्या होंगी।

पौराणिक मान्यताएं

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में स्नान करने से पाप धुल जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यही वजह है कि हर साल मकर संक्रांति से लेकर पूरे माघ महीने तक लाखों भक्त संगम तट पर नहाने, पूजा और ध्यान करने के लिए इकट्ठा होते हैं। पुराणों में संगम को पवित्र जगह बताया गया है, जबकि अक्षयवट, सरस्वती कूप और त्रिवेणी क्षेत्र को पुराने समय से ही तपस्या की जगह माना जाता रहा है। इतिहासकारों के अनुसार, यह मेला हजारों सालों से लगातार लग रहा है। समय के साथ इसकी भव्यता लगातार बढ़ती गई है।

माघ मेला 2026 कब शुरू होगा?

कैलेंडर के अनुसार, माघ मेला पौष पूर्णिमा से शुरू होगा और महाशिवरात्रि तक चलेगा। इसका मतलब है कि माघ मेला 3 जनवरी, 2026 को शुरू होगा और 15 फरवरी, 2026 तक चलेगा। इस दौरान छह बड़े माघ स्नान किए जाएंगे, जिसमें मौनी अमावस्या का स्नान सबसे खास माना जाता है।

पौष पूर्णिमा – 3 जनवरी, 2026

पौष पूर्णिमा पर पवित्र स्नान के साथ मेले की शुरुआत होती है। इसी दिन कल्पवास भी शुरू होता है। भक्त संगम में डुबकी लगाकर अपनी साधना शुरू करते हैं।

मकर संक्रांति – 14 जनवरी, 2026

मकर संक्रांति पर, सूर्य धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है। इसे स्नान के लिए बहुत शुभ तिथि माना जाता है। इस दिन दूसरा शाही माघ स्नान होता है।

मौनी अमावस्या – 18 जनवरी, 2026

मौनी अमावस्या को माघ मेले का सबसे बड़ा और सबसे महत्वपूर्ण स्नान पर्व माना जाता है। इस दिन मौन ध्यान, दान और संगम में स्नान करना विशेष रूप से फलदायी होता है। इस दिन को तीसरे बड़े स्नान के रूप में मनाया जाएगा।

वसंत पंचमी – 23 जनवरी, 2026

चौथा बड़ा स्नान वसंत पंचमी को होगा, जो वसंत के आगमन का प्रतीक है। इस दिन को सरस्वती पूजा और नए उत्साह का प्रतीक माना जाता है।

माघी पूर्णिमा – 1 फरवरी, 2026

कल्पवासियों के लिए इस तिथि का खास महत्व है। माघी पूर्णिमा पर संगम में स्नान और दान करना बहुत शुभ माना जाता है। यह मेले का पांचवां बड़ा स्नान है।

महाशिवरात्रि – 15 फरवरी, 2026

माघ मेला महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर आखिरी स्नान के साथ खत्म होगा। संगम में स्नान, ध्यान, व्रत और भगवान शिव की पूजा का खास महत्व है।

ये भी पढ़ें- Homesickness: घर से दूर रहने पर आ रही है घर की याद, तो अपनाए ये 5 टिप्स

और खबरें

ताजा खबर