hijab controversy: बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा, डाक्टरों को नियुक्ति पत्र वितरण के सार्वजनिक कार्यक्रम में एक मुस्लिम महिला डाक्टर का हिजाब (चेहरे का नक़ाब) हटाने का मामला सुलझने की बजाय, ख़ासकर मंत्रियों आदि की बयानबाजी़ के कारण, विवाद का रूप लेकर यह लगातार तूल पकड़ता ही जा रहा है, जो दुखद व दुभाग्यपूर्ण।
जबकि यह मामला पहली नज़र में ही महिला सुरक्षा व सम्मान से जुड़ा होने के कारण माननीय मुख्यमंत्री के सीधे हस्तक्षेप से अब तक सुलझ जाना चाहिये था ख़ासकर तब जब कई जगहों पर ऐसी अन्य वारदातें भी सुनने को मिल रही हैं। अच्छा होगा कि मा. मुख्यमंत्री इस घटना को सही परिप्रेक्ष्य में देखते हुये इसके लिये पश्चाताप कर लें और कड़वा होते जा रहे इस विवाद को यहीं पर ख़त्म करने का प्रयास करें।
अनुशासन एवं कानून का राज के हक़ में उचित होगा
इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के बहराइच ज़िला पुलिस द्वारा पुलिस परेड में, स्थापित परम्परा/नियमों से हटकर, एक कथावाचक को सलामी देने का मामला भी काफी बड़े विवाद में है और इसको लेकर सरकार कठघरे में है। पुलिस परेड व सलामी की अपनी परम्परा/नियम, मर्यादा, अनुशासन व पवित्रता है, जिसको लेकर खिलवाड़ कतई नहीं किया जाना चाहिये। यह अच्छी बात है कि यूपी के पुलिस प्रमुख ने इस घटना का संज्ञान लेकर ज़िला पुलिस कप्तान से जवाब तलब किया है। कार्रवाई का लोगों को इंतज़ार है। वैसे राज्य सरकार भी इसको गंभीरता से लेकर ऐसी घटनाओं की पुनरावृति पर रोक लगाये तो यह पुलिस प्रशासन/अनुशासन एवं कानून का राज के हक़ में उचित होगा।
जनकल्याण के प्रति गंभीर होकर संदन में इन पर जवाबदेह
जहाँ तक कल दिनांक 19 दिसम्बर से शुरू हुये उत्तर प्रदेश विधान सभा के संक्षिप्त शीतकालीन सत्र का सवाल है, तो यह सत्र भी पिछले सत्रों की तरह ही, जनहित व जनकल्याण के मुद्दों से दूर रहने के कारण सत्ता व विपक्ष के बीच वाद-विवाद में घिर गया है। बेहतर होता कि सरकार किसानों के खाद की समस्या के साथ-साथ जनहित की अन्य समस्याओं तथा जनकल्याण के प्रति गंभीर होकर संदन में इन पर जवाबदेह होती।
ज्वलन्त समस्याओं पर विचार करेंगे
इसके साथ ही, संसद का शीतकालीन सत्र भी, राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की भीषण समस्या सहित देश व जनहित की विकराल रूप धारण कर रही समस्याओं पर विचार किये बिना ही, कल समाप्त हो गया। जबकि पूरे देश की निगाहें लगी थीं कि सरकार व विपक्ष दोनों देश के ज्वलन्त समस्याओं पर विचार करेंगे और इससे कुछ उम्मीद की नई किरण पैदा होगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं होना दुभाग्यपूर्ण। देश की चिन्तायें लगातार बरकरार।
इसके साथ-साथ, पड़ोसी देश बांग्लादेश में जो हालात तेज़ी से बिगड़ रहे हैं तथा वहाँ भी नेपाल की तरह भारत विरोधी गतिविधियाँ बढ़ रही हैं, वे भी चिन्तनीय स्थिति है, जिसपर भी केन्द्र सरकार समुचित संज्ञान लेकर दीर्घकालीन नीति के तहत कार्य करे तो यह उचित होगा। धन्यवाद।
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