Ghaziabad three sisters suicide case: गाजियाबाद में तीन सगी नाबालिग बहनों की सामूहिक आत्महत्या को लेकर सामने आ रही नई जानकारियों ने शुरुआती ‘ऑनलाइन गेमिंग की लत’ वाले दावे को संदेह के घेरे में ला दिया है। पुलिस जांच में अब तक तीनों बहनों के मोबाइल फोन से ऐसा कोई गेम या टास्क-बेस्ड ऐप बरामद नहीं हुआ है, जिसे सीधे तौर पर आत्महत्या से जोड़ा जा सके।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मामले में अब पारिवारिक पृष्ठभूमि, आर्थिक स्थिति और मानसिक अवस्था को केंद्र में रखकर जांच आगे बढ़ाई जा रही है।
पारिवारिक संरचना पर सवाल
जांच में सामने आया है कि मृतक बहनों के पिता ने अपनी साली से दूसरी शादी की थी। दोनों पत्नियों से कुल पाँच बच्चे बताए जा रहे हैं। परिवार एक छोटे से फ्लैट में रह रहा था। ऐसे में पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि घर के भीतर का माहौल कैसा था और बच्चों पर इसका क्या मानसिक प्रभाव पड़ा।
आर्थिक स्थिति और पेशा
पिता का पेशा ऑनलाइन ट्रेडिंग बताया जा रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि ऑनलाइन ट्रेडिंग को नियमित नौकरी नहीं माना जा सकता, खासकर तब जब परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं बताई जा रही हो।
सूत्रों के मुताबिक, यह आशंका भी जांच के दायरे में है कि कहीं आर्थिक नुकसान, कर्ज या अस्थिर आय का दबाव परिवार और बच्चों के मनोविज्ञान पर असर तो नहीं डाल रहा था।
सबसे बड़ा सवाल
स्कूल से दूरी और ‘अलग दुनिया’
तीनों बहनें लंबे समय से स्कूल नहीं जा रही थीं। पुलिस को उनके कमरे से कई संदिग्ध पेंटिंग्स, स्केच और कुछ नोट्स मिले हैं, जो यह संकेत देते हैं कि वे एक कल्पनात्मक या अलग मानसिक दुनिया में जी रही थीं।
इसके अलावा, लड़कियों के K-ड्रामा, K-पॉप और K-फैशन से अत्यधिक प्रभावित होने की भी बात सामने आई है। हालांकि पुलिस इसे सीधे आत्महत्या का कारण मानने से फिलहाल बच रही है, लेकिन मानसिक प्रोफाइलिंग के तहत इसे भी दर्ज किया गया है।
पुलिस के सामने अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि“एक छोटे से फ्लैट में पिछले दो वर्षों से इतना कुछ चलता रहा और अभिभावकों को इसकी भनक तक नहीं लगी—यह कैसे संभव है।
जांच का अगला चरण
फॉरेंसिक टीम मोबाइल, लैपटॉप, नोट्स और पेंटिंग्स की बारीकी से जांच कर रही है। परिजनों और रिश्तेदारों से दोबारा पूछताछ की जा रही है। पुलिस का कहना है कि किसी एक कारण पर निष्कर्ष निकालना जल्दबाज़ी होगी।
अधिकारियों के मुताबिक, यह मामला गेमिंग नहीं, बल्कि बहुस्तरीय सामाजिक, आर्थिक और मानसिक दबावों से जुड़ा हो सकता है, जिसकी तह तक जाना बेहद ज़रूरी है।
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