ED’s ‘Operation Clean Sweep’: 36 घंटे की तलाशी में छिपा था अरबों का जाल: कोडीन तस्करी के मास्टरमाइंड शुभम से जुड़े ठिकानों पर ED का ‘ट्रेजर हंट’
लखनऊ/जौनपुर में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने कोडीन युक्त कफ सिरप की अवैध तस्करी के काले साम्राज्य को ध्वस्त करने के लिए शुक्रवार सुबह एक ऐसी कार्रवाई शुरू की, जो 36 घंटे तक चली और शनिवार शाम को ही थमी। मुख्य आरोपी और मास्टरमाइंड शुभम जायसवाल के करीबी चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) विष्णु अग्रवाल के घर और दफ्तर पर दबिश डालते ही ED को 425 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेन-देन के चौंकाने वाले सबूत हाथ लगे। यह खुलासा न सिर्फ धनशोधन के गहरे जाल को उजागर करता है, बल्कि उत्तर प्रदेश से झारखंड और गुजरात तक फैले इस नेटवर्क की पोल खोलता है।
STF का बर्खास्त सिपाही
कुल मिलाकर, इस गिरोह की कमाई 1,000 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है, जो अवैध कफ सिरप के उत्पादन, व्यापार और सप्लाई से अर्जित हुई। कार्रवाई की शुरुआत जौनपुर में विष्णु अग्रवाल के आलीशान ठिकाने से हुई, जहां ED की विशेष टीम ने सुबह होते ही ताले तोड़े। 36 घंटे की अथक मारा-मारी के दौरान 140 से अधिक फर्मों के वित्तीय रिकॉर्ड, बैंक स्टेटमेंट्स और ट्रांजेक्शन डिटेल्स जब्त कर लिए गए। ये दस्तावेज न सिर्फ शुभम जायसवाल के फाइनेंशियल साम्राज्य की नींव उजागर करते हैं, बल्कि उसके सहयोगी आलोक सिंह– जो STF का बर्खास्त सिपाही है–के रसूख को भी नंगा करते हैं।
आलोक के घर पर रात भर रुकी ED टीम ने वहां से भी महत्वपूर्ण क्लू बरामद किए, जो पूरे नेटवर्क को जोड़ते हैं।शुभम जायसवाल का नाम आते ही याद आती है वह फरार अपराधी की कहानी, जो कोडीन-मुक्त कफ सिरप (CBC Syrup) के नाम पर नशे की लत फैलाने वाले इस धंधे का सरगना है। उसके घर पर दबिश में ED को ब्रांडेड महंगी घड़ियों का शानदार कलेक्शन मिला– वे घड़ियां जो किसी राजा के खजाने से कम नहीं लगतीं। ये लग्जरी आइटम्स अवैध कमाई की चमकदार मिसाल हैं, जो बताते हैं कि कैसे काले धन ने इनके जीवन को चकाचौंध से भर दिया। ED ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत केस दर्ज किया है, और उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से 30 से ज्यादा FIR पहले ही दर्ज हो चुकी हैं।
ED का संदेश साफ है
यह छापेमारी सिर्फ उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रही। ED ने एक साथ 25 ठिकानों पर हमला बोला – वाराणसी, सहारनपुर, लखनऊ के अलावा झारखंड के रांची और गुजरात के अहमदाबाद तक पहुंच बनाई। अमित सिंह जैसे अन्य सहयोगियों के लिंक्स भी जांच के दायरे में हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये सबूत गिरोह के अंतरराज्यीय नेटवर्क को तोड़ने में मील का पत्थर साबित होंगे। शुभम जायसवाल अभी भी फरार है, लेकिन ED का संदेश साफ है: काला धन छिपा नहीं रह सकता।
इस कार्रवाई से न सिर्फ कानून की जीत हुई है, बल्कि समाज को भी एक चेतावनी मिली है कि नशे के इस जाल में फंसने वाले कैसे अपनी जिंदगी बर्बाद कर लेते हैं। ED की टीम अब इन सबूतों के साथ दिल्ली लौट चुकी है, जहां गहन विश्लेषण से और बड़े नाम उजागर हो सकते हैं। 2025 का यह अंतिम बड़ा धमाका 2026 की जांच एजेंसियों के लिए नया जोश भर रहा है।
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