Monday, January 26, 2026

CM YOGI: धर्म ही है, जीवन जीने की कलाः

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CM YOGI: November 2025:श्रीमद्भगवद् गीता के 18 अध्यायों के 700 श्लोकों में सभी श्लोक जीवन को यह प्रेरणा देते है कि जीवन धर्म से शुरु होता है और अतं में मर्म में विराम लेता है। भारत के मनीषियों ने धर्म को कर्म के साथ जोड़ा है और श्रीमद्भगवद् गीता धर्म की वास्तविक प्रेरणा है यह वक्तव्य उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ ने दिनांक 23 नवम्बर दिन रविवार को लखनऊ में जियो गीता के तत्वाधान में आयोजित दिव्य गीता प्रेरणा महोत्सव में कही। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण की जन्म भूमि और कर्मभूमि उत्तर प्रदेश अत्यंत पावन भूमि है। प्रत्येक व्यक्ति अपनी उपासना के अनुरुप आस्था रखता है और धर्म ही जीवन जीने की कला है।

धर्मक्षेत्रे  कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः

मुख्यमंत्री जी ने श्रीमद्भगवद् गीता के प्रथम श्लोक का वर्णन करते हुये कहा कि धर्मक्षेत्रे  कुरुक्षेत्रे समवेता युयुत्सवः। मामकाः पाण्डवाश्र्चैव किमकुर्वत सज्जय।। जिसका अर्थ है यह जीवन भी एक धर्मक्षेत्र है, जहाँ हर दिन हमें सही और गलत के बीच चुनाव करना होता है। युद्ध का मैदान भी धर्म क्षेत्र है यहाँ कर्तव्यों के लिये लड़ा जा रहा है।

लेकिन अधर्म के मार्ग पर चल कर विजय कदापि नहीं हो सकती इसलिये जीत के लिये हमेशा धर्म और सत्य के मार्ग पर चलना चाहिये। धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा व्यक्ति को श्रीमद्भगवद् गीता से मिलती है और जीयो और जीने दो की प्रेरणा भारत की धरती ने दी है। इसलिये व्यक्ति को फल की चिंता न करते हुये कर्म करते रहना चाहिये।

शरीर तो वस्त्र है, बदला जायेगाः

समस्या से भागो मत सामना करों कोई मरता नहीं कोई मारता नहीं शरीर तो वस्त्र है जिसका बदला जाना तय है। चिंता नहीं करनी चाहिये जो होता है लाभ के लिये होता है। जगत विधाता श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन से कुरुक्षेत्र के मैदान में कहे गये उपदेशों का व्याख्यान करते हुये आरएसएस के वर्तमान संचालक डॉ मोहन राव भागवत ने कहा कि श्रीमद्भगवद् गीता में सभी परिस्थितियों के उपाय मिलते है। 1857 के विद्रोह के संर्दभ को लेते हुये भागवत जी ने बताया कि 1857 के वीर भले ही अग्रेंजों को हरा नहीं सके हो लेकिन भारत देश युगोयुगों तक उनका स्मरण करेगा। इसलिये सफलता असफलता से विचलित न होते हुये समाज की उन्नति के लिये निश्वार्थ भाव से कर्म करते रहना चाहिये कर्म से किसी व्यक्ति को मुक्ति नही मिल सकती है। लेकिन कर्म को ज्ञानपूर्वक और धर्मयुक्त होकर करना फलदायक सिद्ध होता है।

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Preeti Rathore
Preeti Rathore
मैंने सी.एस.जे.एम. वि.वि. से MJMC, LLb, B.Ed, M.Sc (Zoology), M.A (Hindi, Economics, Political Science), "O" Level, CCC Computer Course एंव राजर्षि टण्डन वि.वि.से PGDMM की डिग्री प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त हिन्दुस्तान प्रेस, K.TV, में ट्रेनी पत्रकार एंव डिग्री कॉलेज और एनजीओ मे पत्रकारिता शिक्षक के रुप में कार्य किया है।

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