Bihar news: पटना। बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर होने वाले चुनाव ने सियासी हलकों में हलचल तेज कर दी है। खाली हो रही सीटों में दो राष्ट्रीय जनता दल, दो जनता दल (यूनाइटेड) और एक रालोमो के खाते की है। मौजूदा गणित के हिसाब से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की चार सीटें लगभग तय मानी जा रही हैं, जबकि पांचवीं सीट को लेकर असली मुकाबला है।
संख्या बल की बात करें तो NDA को पांचवीं सीट जीतने के लिए प्रथम वरीयता के महज तीन अतिरिक्त वोटों की जरूरत है। कुल वोट 41 हैं। ऐसे में बिना क्रॉस वोटिंग के NDA के लिए यह राह आसान नहीं है। यही वजह है कि पांचवीं सीट को लेकर रणनीति, उम्मीदवार और समीकरण—तीनों निर्णायक होंगे।
विपक्ष की रणनीति*पावरफुल उम्मीदवार पर दांव
सूत्रों के मुताबिक, विपक्ष चाहता है कि पांचवीं सीट पर उम्मीदवार राजद ही उतारे। ऐसी स्थिति में उम्मीदवार का ‘मजबूत’ और संसाधन संपन्न होना जरूरी होगा, ताकि जरूरी तीन वोट जुटाए जा सकें। NDA की चार सीटें तय होने के बाद उसके पास 38 वोट बचते हैं। अगर विपक्ष सामूहिक रणनीति बनाता है तो ओवैसी के पांच और बसपा का एक वोट मिलाकर आंकड़ा 41 तक पहुंच सकता है।
सत्ता पक्ष ने उतारा उम्मीदवार तो बढ़ेगी टक्कर
अगर NDA भी पांचवीं सीट पर उम्मीदवार उतारता है तो मुकाबला सीधा और कड़ा होगा। तब सत्ता पक्ष को भी चेहरा बेहद सोच-समझकर चुनना पड़ेगा। किसे उतारा जाएगा, यह अभी भविष्य के गर्भ में है।
जेडीयू का स्टैंड: रिस्क से परहेज
जेडीयू से रामनाथ ठाकुर का जाना लगभग तय माना जा रहा है। अति पिछड़ा वर्ग में वे पार्टी का बड़ा चेहरा हैं और कर्पूरी ठाकुर से जुड़ी उनकी पहचान को देखते हुए पार्टी कोई जोखिम नहीं लेना चाहती, खासकर तब जब यूपी चुनाव भी सामने हैं।
वहीं हरिवंश के मामले में भी जेडीयू सतर्क है। राज्यसभा में उनके संवैधानिक पद को देखते हुए अगर पार्टी उन्हें दोबारा नहीं भेजती, तो यह पद किसी अन्य सहयोगी दल, जैसे टीडीपी, के खाते में जा सकता है। ऐसे में जेडीयू की रणनीति में गलती की गुंजाइश कम है। हालांकि मनीष वर्मा का नाम भी चर्चा में है, लेकिन इसे फिलहाल मीडिया लॉबिंग माना जा रहा है।
बीजेपी के सामने ‘धर्म संकट’
भारतीय जनता पार्टी के लिए यह चुनाव सबसे ज्यादा पेचीदा साबित हो रहा है। पार्टी पर पहले से तीन बड़े कमिटमेंट बताए जा रहे हैं—पवन सिंह, उपेंद्र कुशवाहा और चिराग पासवान।
अगर एक सीट से पवन सिंह को भेजा जाता है, तो दूसरी सीट पर कुशवाहा या चिराग में से किसे मौका मिलेगा, यह बड़ा सवाल है। यदि बीजेपी दोनों सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारती है, तो पांचवीं सीट के खेल में किसी एक सहयोगी को छोड़ना पड़ सकता है। इस स्थिति में चिराग पासवान, कुशवाहा की तुलना में ज्यादा मजबूत नजर आते हैं।
उपेंद्र कुशवाहा खुद पार्टी अध्यक्ष हैं। हालिया आंतरिक विवाद और बेटे से जुड़े प्रकरण के कारण उनकी दावेदारी कमजोर पड़ती दिख रही है। यदि वे राज्यसभा नहीं पहुंचे, तो दिल्ली की राजनीति में उनकी पार्टी की पकड़ पर असर पड़ सकता है।
चिराग पासवान राज्यसभा में एंट्री के इच्छुक बताए जा रहे हैं। उनकी मां के नाम की चर्चा भी है, लेकिन यह रास्ता आसान नहीं दिखता।
अन्य नाम और जातीय समीकरण
बीजेपी से अश्विनी चौबे का नाम मजबूत दावेदारों में है। बताया जाता है कि चुनाव के वक्त उनसे वादा किया गया था, लेकिन बिहार बीजेपी से पहले ही दो ब्राह्मण राज्यसभा में हैं, जिससे उनकी राह कठिन है। राजेश वर्मा का नाम भी सामने है, मगर नए प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन के रहते मौजूदा टर्म में संभावना कम मानी जा रही है।
यदि बीजेपी भूमिहार चेहरे पर विचार करती है, तो नितिन नवीन की पसंद का कोई नाम उभर सकता है। फिलहाल सवर्ण कोटे में पवन सिंह सबसे मजबूत दावेदार दिख रहे हैं, जबकि दूसरी सीट पर किसी पिछड़ा वर्ग या महिला उम्मीदवार पर दांव लगाया जा सकता है। इस सूची में एक पूर्व महिला सांसद और पार्टी प्रवक्ता प्रेम रंजन पटेल का नाम भी चर्चा में है।
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