Ayodhya news: समाजसेवी ने बताया की प्रभु श्री राम के वनवास मार्ग के प्रथम पड़ाव—’रामपुर भगन’ स्थित प्राचीन ‘सूर्य कुंड’ हुआ था जिसका कायाकल्प होना बहुत जरूरी है इस पौराणिक स्थल को देखने के लिए बहुत दूर दूर से लोग आते हैं जहां पर श्रद्धालुओं को अव्यवस्था होती है समाजसेबी ने बताया की अयोध्या धाम का दिव्य एवं भव्य कायाकल्प हो रहा है, जिससे संपूर्ण विश्व में सनातन संस्कृति का गौरव पुनर्स्थापित हुआ है। इसी क्रम में, अयोध्या के तहसील बीकापुर एवं विकास खंड तारुन के अंतर्गत रामपुर भगन (बाजार) स्थित अत्यंत प्राचीन एवं पौराणिक ‘सूर्य कुंड’ की उपेक्षित है
इस पावन स्थल का धार्मिक एवं ऐतिहासिक महत्व अत्यंत गहरा है।
प्रभु श्री राम का प्रथम पड़ाव: धार्मिक मान्यताओं एवं क्षेत्रीय जनश्रुतियों के अनुसार, वनवास गमन के समय मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम, माता जानकी एवं लक्ष्मण जी ने अयोध्या की सीमा त्यागने के पश्चात अपनी प्रथम रात्रि इसी रामपुर भगन क्षेत्र में व्यतीत की थी। इसी पावन सूर्य कुंड के तट पर प्रभु ने अपनी पहली संध्या वंदन और सूर्य उपासना की थी। जिसमे पक्की सीढ़ियों एवं घाटों का अभाव: अत्यंत खेद का विषय है कि त्रेतायुगीन स्मृतियों को संजोए इस महत्वपूर्ण स्थल पर आज तक पक्की सीढ़ियों (घाटों) का निर्माण नहीं हो सका है। जहाँ जनपद के अन्य पौराणिक कुंडों का कायाकल्प हुआ है, वहीं रामपुर भगन का यह सूर्य कुंड आज भी अपनी बदहाली पर आँसू बहा रहा है।

श्रद्धालुओं को भारी असुविधा: यहाँ घाट न होने के कारण वृद्ध एवं महिला श्रद्धालुओं को आचमन, स्नान व पूजन में भारी कठिनाई होती है। साथ ही परिसर में प्रकाश (Lighting) एवं शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं का सर्वथा अभाव है।
रामपुर भगन स्थित इस प्राचीन सूर्य कुंड को ‘राम वन गमन मार्ग’ के प्रमुख केंद्र के रूप में चिन्हित कर इसका अविलंब जीर्णोद्धार कराया जाए।
कुंड के चारों ओर पक्की सीढ़ियों, भव्य घाटों एवं परिक्रमा मार्ग का निर्माण सुनिश्चित किया जाए।
परिसर में हाई-मास्ट लाइट, बैठने हेतु बेंच एवं पेयजल की व्यवस्था कर इसे एक आदर्श धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए।
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