Dussehra: October 2025: अहंकारी एंव अर्धमी प्रवृति रखने वाला रावण ब्राह्मण ॠषि विश्रवा और राक्षसी कैकसी का पुत्र और कुबेर का सौतेला भाई था। ब्राह्मण और राक्षसी का पुत्र होने के कारण उसमें दोनों ही गुणों की प्रवृति शामिल थी। मान्यता है कि रावण अपने पहले पूर्व जन्म में विष्णु जी का द्वारपाल जय और कुंभकरण विजय था। जिसने अपने अहंकार के वशीभूत होकर ब्राह्मणों और कई ॠषि मुनियों का अपमान किया था। जिसके कारण सतयुग में दोनों भाई हिरण्याक्ष और हिरण्यकश्यपु के रुप में जन्में थे।

नरसिंह अवतार में विष्णु जी ने हिरण्याक्ष हिरण्यकश्यपु का किया, वधः
सतयुग में भगवान विष्णु ने नरसिंह का अवतार लेकर हिरण्याक्ष हिरण्यकश्यपु दोनों भाईयों का सर्वनाश कर दिया। जिसके उपरान्त त्रेतायुग में उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा के पास स्थित बिसरख गाँव में रावण और कुभंकरण के रुप में दोनों ने अपना तीसरा जन्म लिया लेकिन दोनों का अत्याचार चरम पर था। अपनी बहन शूर्पणनखा के अपमान का बदला लेने के लिये श्रीराम की पत्नी सीता जी का हरण करना रावण के विनाश का कारण बन गया था। रावण अपने को बहुत बलशाली समझता था उसने अपने बल से अपने सौतेले भाई कुबेर से पुष्पक विमान छीन कर उसे लंका से निष्काषित कर दिया। अपनी शक्ति बल का दुरुपयोग करते हुये बालि की पत्नी अंगद की माता मंदोदरी का हरण करके विवाह किया।
चार वेदों का ज्ञाता शिव जी का परम भक्त था, रावणः
।।जटा-टवी-गलज्-जल-प्रवाह-पावित-स्थले,गलेऽवलम्ब्यलम्बितां भुजंड्ग तुंग्ड मालिकाम्। मान जाता है कि अपने अहंकार का प्रर्दशन करने के उद्देश्य से रावण कैलाश पर्वत को जब उठाने लगा तब शिव जी ने पर्वत का आकार बड़ा कर दिया और रावण ने शिव जी को प्रसन्न करने के लिये शिव महिमा और शक्ति का व्याख्यान करते हुये शिवशक्ति एंव करुणा से भरे शिव ताडंव स्तोत्र का रचना की।

जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव ने रावण को आत्मलिंग प्रदान किया। लेकिन ब्रह्मा द्वारा दिये गये अजेय होने का वरदान और शिव जी के दिये वरदानों का रावण अधर्म करने के लिये दुरुपयोग करने लगा। जिसकी वजह से चार वेदों का ज्ञाता, राजनीतिज्ञ, परम विद्वान, दश सिर वाला दशानन, दशग्रीव एंव सोने की लंका का स्वामी लंकेश, लंकापति को भगवान श्रीराम के हाथों पराजित होकर मृत्यु को प्राप्त होना पड़ा और अधर्म पर धर्म की जीत हुई।
नाभि पर प्रहार से रावण की हुई, मृत्युः
कहा जाता है कि श्री राम ने रावण पर 30 तीरों से प्रहार किया लेकिन समस्त तीर बेअसर हो गये जब श्री राम ने 31वें तीर से रावण की नाभि में वार किया तब उसकी मृत्यु संभव हो सकी। रावण के वध के बाद श्री राम ने मंदोदरी का विवाह विभीषण से करा दिया। कुछ कथाओं में वर्णित है कि श्री लंका के जंगलों की गुफाओं में रावण के शव को दफन किया गया था।
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