OM CHANTING: December 2025:ब्रह्मांडीय प्रथम ध्वनि ओम नाद एक ऐसी ध्वनि है जो मानव शरीर के तंत्रिका तंत्र को ऊर्जा से भर देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। मानव जाति को ब्रह्मांड से जोड़ने में सक्षम ओम ध्वनि धर्म, मोक्ष, काम और अर्थ समस्त पुरुषार्थो की प्रदाता सबसे अधिक शक्तिशाली है। ध्वनियाँ शरीर के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग कंपन से प्रभावित करती हैं। प्रत्येक अक्षर या कंपन का शरीर से अनोखा संबंध होता है।
ॐ ध्वनि करती है, शरीर के विभिन्न हिस्सों को सक्रियः
यह सभी ध्वनियाँ शरीर के तंत्रिका तंत्र द्वारा अंगों को प्रभावित करती है। जब ॐ की ध्वनि निकलती है, तो यह आपके शरीर के विभिन्न हिस्सों को एक-एक करके सक्रिय करती है, जो पेट से शुरू होती है और पीठ के होते हुये मस्तिष्क में पहुँचती है। यह केवल एक ध्वनि नही बल्कि कई साधक इसे अपने उद्देश्यों की प्राप्ति के लिये ओम नाद का उच्चारण करते है।

ओम ध्वनि का उच्चारण शान्त जगह पर करने से वातावरण में सकरात्मक ऊर्जा के प्रवाह के साथ तनाव में कमी के अलावा ध्यान केन्द्रित करके मन को शान्ति प्रदान करती है। ध्यान और एकाग्रता में वृद्धि के साथ इस ध्वनि के साथ जीवन में परिवर्तन देखने को मिलते है।
सबसे शक्तिशाली मंत्र है, ॐनमः शिवायः
जगत विधाता भगवान श्रीकृष्ण की श्रीमद्भगवद्गीता में कहा गया है कि ओम शब्द उच्चारण से पुण्यों की प्राप्ति होती है। इसके अलावा ब्रह्मांड के सबसे शक्तिशाली मंत्र तीनों लोकों के स्वामी देव आदिदेव महादेव को समर्पित मंत्र ॐ नमः शिवाय का योग मुद्रा में जाप करने से मानसिक शांति, आत्मा को शिव से जोड़ने के लिये व्यक्ति में आध्यात्मिकता जाग्रत होती है। पापों का नाश, मनोकामनाओं की पूर्ति और पृथ्वी, अग्नि, वायु, आकाश से जुडें अक्षर शरीर औऱ ब्रह्मांड में संतुलन बनाये रखने में सक्षम भगवान शिव का यह मंत्र समस्त ग्रहों के अशुभ प्रभावों से भी मुक्ति प्रदान करता है।

ॐ जोड़ने से मंत्र होते है, शक्तिशालीः
सार्वभौमिक ध्वनि ओम नाद को ॐ रमाय नमः, ॐ विष्णवे नमः आदि समस्त देवी देवताओं को समर्पित मंत्रों के साथ जोड़ने से मंत्र शुद्ध और शक्तिशाली हो जाते है।
कई अध्ययनों से यह सिद्ध होता है कि नियमित रूप से मंत्रो का उच्चारण करने से मानसिक शांति प्राप्त होती है, तनाव दूर होता है और एकाग्रता बढ़ती है। स्वास्थ्य में सुधार के साथ सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है।
जगत का पहला स्वर है, ॐ
यदि हम अपने अन्दर के स्वर को सुनेगें तो ओम नाद की तरह सुनाई देगा। यह जगत, विज्ञान, आध्यात्म की सच्चाई है। यह वक्तव्य उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय योगी आदित्यनाथ ने दिनांक 18 दिसम्बर दिन गुरुवार को भातखण्डे संस्कृति विश्वविद्धालय लखनऊ के शताब्दी महोत्सव के उद्घाटन समारोह मे दिया। इन्होंने कहा कि ओमनाद हमारी संस्कृति है

