National Press Day: November 2025: देश का चौथा स्तम्भ मीडिया आम जनता की आवाज को प्रमुखता के साथ शासन प्रशासन तक पहुँचाने की क्षमता रखती है। मीडिया के बगैर राष्ट्र के किसी भी संस्थान को सुव्यवस्थित ढंग से संचालित किया जाना संभव ही नहीं हो सकता है। मीडिया आम जनता के हितों को ध्यान में रखकर प्रत्येक घटना दुर्घटना पर अपनी पैनी नजर रखते हुये सच्चाई से जनमानस को अवगत कराने में मह्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिये प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी प्रेस की स्वतंत्रता के लिये दिनांक 16 नवम्बर दिन रविवार को संपूर्ण देश में राष्ट्रीय प्रेस दिवस के रुप में मनाया गया।

1966 में हुई थी प्रेस परिषद की स्थापना
राष्ट्रीय प्रेस दिवस 1966 भारतीय प्रेस परिषद के स्थापना दिवस के अवसर को ध्यान में रखकर मनाया जाता है। जो कि प्रेस की स्वतंत्रता के साथ उसकी जिम्मेदारियों के महत्व को प्रदर्शित करता है। देश की आजादी के समय से मीडिया का इतिहास बहुत ही संघर्षपूर्ण रहा है। हमारे देश में शासन कर रहे अग्रेंजों ने समय-समय पर कई तरह की अधिनियमों द्वारा प्रेस में प्रकाशित हो रही खबरों को रोकने का प्रयास किया गया। लेकिन स्वतंत्रता सेनानियों और भूमिगत पत्रकारों के काऱण उनके सभी प्रयास असफल हो गये।
लॉर्ड वेलेजली द्वारा लगाया गया था, प्रेस पर सेंसरशिप पहला अधिनियमः
सर्वप्रथम प्रेस की आजादी को नियंत्रित करने के उद्देश्य से 1799 को गर्वनर जनरल लॉर्ड वेलेजली द्वारा सेंसरशिप अधिनियम लगाया गया जिसके तहत रविवार को समाचार पत्रों को प्रकाशित करने पर मनाही थी और गर्वनर के द्वारा समाचार पत्र के निरीक्षण के बाद ही समाचार पत्र को प्रकाशित करने का नियम लागू किया गया था। 1878 का वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट ने अग्रेंजी भाषा के अतिरिक्त अन्य भाषाओं के समाचार को प्रकाशित करने पर रोक लगा दी ताकि अग्रेंजी सरकार की बेबुनियादी नीतियों को आम जनता समझने मे असक्षम रहे।

1910 में सरकार विरोधी साहित्य प्रकाशन पर थी, रोकः
भारतीय प्रेस 1910 के अधिनियम ने सरकार की विरोधी नीतियों के विरुद्ध प्रकाशित होने वाले साहित्यों पर रोक लगा दी गई और ऐसी प्रकाशित सामग्री को जब्त करने के निर्देश दे दिये गये थे। जिसमें अग्रेंजी सरकार विरोधी नीतियां शामिल थी। इन्हीं सब अधिनियमों से प्रेस को निजात दिलाने के लिये आजादी के बाद प्रेस की स्वतंत्रता को बनाये रखने के उद्देश्य से भारतीय प्रेस परिषद का गठन किया गया। जिसका कार्य भारतीय प्रेस के स्वतंत्रता और समाचार समितियों के मानकों को बनाये रखने के लिये उनके हितो को ध्यान में रखते हुये नियम बनाना था।
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