Children’s Day: November 2025: 14 नवम्बर1889 में इलाहाबाद में जन्में वकील और कांग्रेसी नेता मोती लाल नेहरु के पुत्र पण्डित जवाहर लाल नेहरु भारत के पहले प्रधानमंत्री होने के साथ एक महान् स्वतंत्रता सेनानी और वकील भी रहे। नेहरु जी को अत्यंत प्रिय बच्चों में वह देश के भविष्य को देखते थे। पण्डित जवाहर लाल नेहरु ने अपनी प्राथमिक शिक्षा घर पर ही ग्रहण की और 15 वर्ष की आयु में आगे की पढ़ाई के लिये इंग्लैंड गये और बाद में लंदन से वकालत की पढ़ाई पूरी करने के उपरान्त 1912 में भारत लौटकर वकालत करने लगे।

महात्मा गांधी थे, पण्डित जवाहर लाल नेहरु के गुरुः
लखनऊ अधिवेशन के दौरान महात्मा गाँधी से पहली मुलाकात में इन्होंने गाँधी जी को अपना गुरु मानकर उनके मार्गदर्शन पर चलने का निर्णय लिया और1919 में राजनीति में कदम रखने के बाद भारतीय राष्ट्रीय काग्रेंस के प्रभुख सदस्य बनकर स्वतंत्रता आन्दोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया था। भारत की आजादी के बाद 1947 में संविधान सभा की बैठक में जब लार्ड माउंटबेटन को गर्वनर जनरल नियुक्त किया तब गर्वनर जनरल माउंटबेटन ने नेहरु जी को प्रधानमंत्री बनने की शपथ दिलायी। जिसके बाद पण्डित जवाहर लाल नेहरु भारत के पहले प्रधानमंत्री बने और आईआईटी, एम्स और इसरो जैसे संस्थानों की स्थापना करके आजाद भारत को आधुनिक भारत की ओर अग्रसर किया। नेहरु जी ने भारत की खोज और विश्व का इतिहास पुस्तकों को लिख कर समस्त देशवासियों के ह्रदय में एक लेखक के तौर पर भी अपनी अनोखी छाप छोड़ी है।

नेहरु जी के पिता जी बचपन में बुलाते थे, जवाहरः
नेहरु जी का असल नाम जवाहर मोती लाल नेहरु था लेकिन उनके पिता उन्हें जवाहर के नाम से बुलाते थे। इसलिये उन्हें जवाहर लाल नेहरु के नाम से जाना जाता है। 27 मई 1964 में दिल का दौरा पड़ने से भारत के कर्मठशील नेता और देश के प्रथम प्रधानमंत्री पण्डित जवाहर लाल नेहरु इस दुनियाँ को हमेशा के लिये अलविदा कह दिया।आजादी के समय 20 नवम्बर को बालदिवस मनाया जाता था लेकिन नेहरु जी के मरणोपरान्त बच्चों के प्रति उनके स्नेह भाव के कारण 14 नवम्बर को उनके जन्मदिन के दिन संपूर्ण भारतवर्ष बालदिवस के रुप में मनाया जाने लगा।
बालदिवस का दिन है, बच्चों को उनके अधिकारों से अवगत करानाः
आज के बच्चे आने वाले कल के लिये देश का भविष्य है। इसलिये बालदिवस का दिन बच्चों के विकास और शिक्षा के साथ उनके अधिकारों को अवगत कराने से है। इस दिन सभी स्कूल एवं बच्चों से संबधित संस्थानों में प्रतियोगिताओं और कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। जिससे वह अपने उज्ज्वल भविष्य की ओर अग्रसर होकर अपने जीवनयापन के मार्ग को प्रशस्त करें और आधुनिक भारत के निर्माण में सहयोग देकर देश को प्रगति की नयी उड़ान दे सकें।

