Hanuman Ji: November 2025: हनुमान जी सूर्यदेव के शिष्य है उन्हें सूर्यदेव से नौ विधाओं को सीखना था। ऐसा माना जाता है कि जब वह पाँच विधाओं को सूर्यदेव से सीख चुके तब शेष चार विधाओं को सीखने के लिये विवाहित होना जरुरी था। इसके सूर्यदेव ने अपनी पूत्री सुवर्चला से हनुमान जी का विवाह करवाया था। विवाह के उपरान्त सुवर्चला तपस्या में लीन हो गई। और हनुमान जी ब्रह्मचर्य का पालन करते हुये सूर्यदेव से चार विधायें और प्राप्त कर ली थी।

बाला जी रुप असीम शक्तियों से परिपूर्णः
अत्यंत मासूमियत और असीम शक्तियों का परिपूर्ण हनुमान जी का बाला जी रुप के दर्शन मात्र से ही भक्तों के संकट कटने शुरु हो जाते है। इनके बाल रुप की पूजा करने से समस्त शक्ति, भय, रोग एवं कष्टों से मुक्ति मिलती है निश्छल मन से बाला जी के रुप की भक्ति करने से सरलता, साहस आत्मविश्वास में वृद्धि होती है और नकरात्मक शक्तियों का नाश होता है। हनुमान जी ने बचपन में भगवान सूर्य को फल समझ अपने मुंह में रख लिया था जब संपूर्ण सृष्टि में अंधकार छा गया तब देवताओं के प्रार्थना किये जाने पर में इन्होंने सूर्य भगवान को अपने मुख से बाहर निकाला था। यह इनकी असीम शक्ति को दर्शाता है।
स्वयंभु रुप में 300 वर्ष पहले स्थापित हुये बागेश्वर धाम में बाला जीः
हिंदू धर्म में हनुमान जी के बाल रुप के मेंहदीपुर बालाजी, सालासर बाला जी और बागेश्वर धाम बाला जी में हनुमान जी बाल रुप में भक्तों के सभी कष्ट मिटाने हेतु विधमान है। माना जाता है कि बागेश्वर धाम में 1200 वर्ष पहले भगवान शिव और 300 वर्ष पहले हनुमान बाला जी स्वंयभु रुप में स्थापित हुये थे। यह मंदिर नकरात्मकता को दूर करने के लिये प्रसिद्ध मंदिरों में माना जाता है। संत सेतु लाल महाराज ने मंदिर की लोकप्रियता को बढ़ाने में विशेष योगदान दिया। जिसके बाद से श्रद्धालुओं की समस्याओं का निवारण कार्य आरम्भ होना शुरु हो गया था। पंण्डित धीरेन्द्र शास्त्री के कारण यह धाम और भी प्रसिद्ध हो गया।

सनातन एकता की यात्रा 16 नवम्बर को वृंदावन में होगी समाप्तः
मन्यता है कि बागेश्वर धाम के पण्डित धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के दरबार में अर्जी लगाने के बाद सपने में बदंर दिखाई देने लगे तो अर्जी स्वीकार मानी जाती है। इस प्रसिद्ध दरबार के पण्डित धीरेन्द्र शास्त्री और अनिरुद्धाचार्य महाराज के साथ सनातन एकता के लिये निकाली जा रही पद यात्रा दिल्ली से 7 नबम्बर को दिल्ली से रवाना हुई और 16 नवम्बर को वृंदावन में समाप्त होगी। इस पद यात्रा में लाखों की संख्या में भक्तगण भजन कीर्तन करते नजर आ रहे थे। अनिरुद्धाचार्य महाराज के अनुसार इस पद यात्रा में इसमें शामिल होने वाले लगभग 25 लाख लोगों की भोजन की व्यवस्था उनके द्वारा करायी जायेगी।
ये भी पढ़ें- Pratapgand News: सरदार पटेल की 150वी जयंती पर भाजपाइयों ने निकाली पदयात्रा

