Dev Deepawali: November 2025: सृष्टि संहारक तीनों लोको के स्वामी देवों के देव आदिदेव स्वंयभु सृष्टि का संहार करने के लिये स्वयं उत्पन्न हुये है। भागवत पुराण के अनुसार ब्रह्मा एंव विष्णु जी में व्याप्त अंहकार को नष्ट करने के लिये महादेव स्वंय प्रकट्य हुये थे। तीसरे नेत्र के तेज से कामदेव को नष्ट करने वाले त्रिलोचन समुद्र मथन में निकला विष जब धरा अपने कंठ में तब बने नीलकंठ। जगत जननी देवी पार्वती के पति उमापति उग्र रुप में अपार शक्तियों को समाहित करने वाले रुद्र का कल्याणकारी रुप शंकर सबका कल्याण कर कहलाये शंभू। महान् देव महादेव ब्रह्मांड के स्वामी विश्वेश देव दिवाली के दिन त्रिपुरासुर का वध कर बने त्रिपुरारी। यमराज भी कांपते है जिनसे कालों के काल महाकाल को समस्त देवी देवताओं समेत संपूर्ण ब्रह्मांड पूजता है।

देव दीपावली के दिन भगवान शिव ने किया था, त्रिपुरासुर का वधः
माना जाता है कि तारकक्ष कमलाक्ष एंव विद्धुन्माली तारकासुर के तीन पुत्र थे यह स्वर्ग, पृथ्वी और पताल में स्थित सोने चाँदी और लोहे के तीन नगरों में रहते थे इन नगरों को त्रिपुर के नाम से जाना जाता था। जब तारकासुर के यह तीनों पुत्र आपस में मिलते तब खूब आतंक मचाते और देवी देवताओं को परेशान करते थे। जिसके कारण समस्त देवी देवता त्रिपुरासुर के आंतक से त्रस्त होकर भगवान शिव के पास पहुँचे और अपनी व्यथा सुनाई तब भगवान शिव ने त्रिपुरासुर का वध करने का निश्चय किया।

भगवान शिव नें पिनाक बाण से काशी में किया त्रिपुरासुर का वधः
ब्रह्मा ने बताया था कि जब यह तीनों नगर एक साथ मिलेगें तभी इनका वध संभव हो सकता है। इसलिये अभिजित नक्षत्र में जब तीनों नगर एक साथ मिले तब देव दीपावली के दिन भगवान शिव ने अपने पिनाक बाण से काशी में तीनों राक्षस समेत नगरों को ध्वस्त कर दिया। जिसके बाद सभी देवी देवताओं ने दीप जलाकर भगवान शिव का स्वागत किया। मान्यता है कि तभी से देव दीपावली मनाने का प्रचलन हिंदू धर्म में प्रारम्भ हो गया।
काशी हो या कानपुर सभी जगह के घाट एंव मंदिर दीपों से जगमगा उठेः
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि दिनांक 5 नवम्बर दिन बुधवार को सभी हिंदू धर्म के लोगों ने देव दीपावली का त्योहार बड़े हर्षोउल्लास के साथ मनाया। काशी हो या कानपुर सभी जगह के घाट और मंदिर दीपों से जगमगा उठे। इस पावन पर्व पर सभी भक्तगणों ने गंगा में दीपदान करने के साथ अपने घरों में भी विषम संख्या में दीप प्रज्ज्वलित किये।

माना जाता है देव दीपावली और कार्तिक पूर्णिमा में गंगा में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है कानपुर शहर के घाटों में स्नान और मंदिरों में दीपदान के लिये भक्तों की भारी संख्या में भीड़ उमड़ी। शहर के परमट मंदिर में हजारों की संख्या में भक्तों नें गंगा में दीपदान किया । जबकि शहर के कमलानगर में जगतविधाता श्रीराधाकृष्ण जे.के. मंदिर में सांयकाल से रात्री 9 बजे तक भक्तगणों को दीपदान करने का समय निर्धारित था। जिसमें भारी संख्या में भक्तगणों में दीपदान करके देव दीपावली का पर्व मनाया।
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