Sunday, April 12, 2026

Tulsi Vivah:तुलसी जी अपने पूर्व जन्म में थी, जलंधर की पत्नी वृंदाः

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Tulsi Vivah:November 2025:जब भगवान शिव ने क्रोध में अपने तीसरे नेत्र को खोला था। मान्यता है कि तब शिव ने अपने तेज को समुद्र में प्रवाहित कर दिया। जिससे दैत्य जलधंर की उत्पत्ति हुई। जिसका विवाह दैत्यों के राजा कालनेमि की पुत्री वृंदा से हुआ था। भगवान विष्णु की परमभक्त वृंदा अत्यंत सहासी सतीत्व और पतिव्रता धर्म का पालन करने वाली पत्नी थी। वृंदा के इस सतीत्व के कारण कोई भी देवता और राक्षस जलंधर को पराजित नही कर सकते थे जिसके कारण उसका वध करना कठिन हो गया था।

दैत्य जलंधर का रुप धारण कर विष्णु जी ने वृंदा के पतिव्रत को किया भंगः

एक कथा के अनुसार जलंधर अपनी प्रचण्ड शक्ति के अहंकार में आकर माता लक्ष्मी को प्राप्त करने के लिये युद्ध किया। लेकिन माता लक्ष्मी ने समुद्र से प्रकट होने के कारण उसे अपने भाई के रुप में स्वीकार लिया। जब वह पार्वती जी को प्राप्त करने की इच्छा से कैलाश पर्वत की ओर प्रस्थान करने लगा तब पार्वती जी उसके विचारों को समझ अर्न्तध्यान हो गई। जिसके कारण भगवान शिव से जलंधर का युद्ध प्रारम्भ हो गया। तभी समस्त देवी देवता चिंतित हो उठे और समस्या समाधान के लिये श्रीहरि के पास पहुँचकर अपनी व्यथा सुनाई। जिसके बाद भगवान विष्णु ने दैत्य जलंधर का रुप धारण कर वृंदा के पास पहुँच गये और वृंदा के पतिव्रत को भंग कर दिया और महादेव वृंदा के पति जलंधर का वध करने में सफल हो सके।

वृंदा ने भगवान विष्णु को दिया पत्थर बन जाने का श्रापः

जब वृंदा को इस बात का आभास हुआ कि उसके पति जलंधर का वध हो चुका है और भगवान विष्णु ने जलंधर का रुप धारण कर छल से उसके पतिव्रत को भंग किया है। तब वृंदा ने क्रोध में आकर भगवान विष्णु को पत्थर बन जाने का श्राप दे दिया और अपने प्राणों को त्याग दिया। जिसके बाद वृंदा का जन्म तुलसी के पौधे के रुप में हुआ और वृंदा के श्राप के कारण भगवान विष्णु पत्थर के शालीग्राम भगवान के रुप में पृथ्वी लोक में विराजमान हो गये। मान्यता है कि भगवान विष्णु वृंदा के सतीत्व से इतना अधिक प्रसन्न हुये कि वृंदा को वरदान दिया कि वह उनके लिये लक्ष्मी जी से अधिक प्रिय है और वह उनके अगले जन्म में शालीग्राम रुप में उनके साथ रहेगें।

तुलसी के पौधे से घर में आती है, सुख समृद्धिः

इसलिये प्रत्येक वर्ष की कार्तिक मास शुक्ल पक्ष की द्वादशी के अगले दिन त्रयोदशी को विधि विधान से तुलसी जी का विवाह भगवान विष्णु जी के शालीग्राम रुप से कराया जाता है। इस दिन सभी घरों में तुलसी के पौधे को सुन्दर वस्त्र और सुहाग की सामग्री से सजा सवारकर उनका शालीग्राम भगवान से विवाह कराने के उपरान्त फल फूल मिष्ठान आदि का भोग लगाकर उनसे घर और जीवन में सुख समद्धि बनाये रखने के लिये प्रार्थना की जाती है। तुलसी को सबसे पवित्र पौधे के रुप में पूजा जाता है। हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को घर में लगाना रोगों से मुक्ति और सुख समृद्धि की वृद्धि हेतु अत्यन्त शुभ माना जाता है। 

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Preeti Rathore
Preeti Rathore
मैंने सी.एस.जे.एम. वि.वि. से MJMC, LLb, B.Ed, M.Sc (Zoology), M.A (Hindi, Economics, Political Science), "O" Level, CCC Computer Course एंव राजर्षि टण्डन वि.वि.से PGDMM की डिग्री प्राप्त की है। इसके अतिरिक्त हिन्दुस्तान प्रेस, K.TV, में ट्रेनी पत्रकार एंव डिग्री कॉलेज और एनजीओ मे पत्रकारिता शिक्षक के रुप में कार्य किया है।

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