Amla Navami: October 2025: ब्रह्मा, विष्णु और महेश त्रिदेवों को संपूर्ण सृष्टि का पालक संहारक और रचनाकारक के रुप में हिंदू संस्कृति पूजती है। मान्यता है कि जगत के पालनहार भगवान विष्णु की नाभि से प्रकटे कमल से प्रकट होकर ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना का कार्य आवला नवमी के दिन से आरम्भ किया था। इसलिये आवंला नवमी को सृष्टि निर्माण का पहला दिन माना जाता है। ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना आकाश, जल, वायु, अग्नि और पृथ्वी आदि तत्वों से की थी। आज हमारी सृष्टि अरबों वर्ष पुरानी हो चुकी है।


आवंला नवमी को आवंले वृक्ष के नीचे होता है, विष्णु जी का वासः
कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को अक्षय नवमी आवंला नवमी मनायी जाती है। माना जाता है कि आवंला नवमी से देवउठनी एकादशी तक भगवान विष्णु आवंले के वृक्ष के नीचे निवास करते है। इसलिये इस दिन विधि विधान से आवलें के वृक्ष की पूजा अर्चना करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। विष्णु जी के प्रिय आवंले के वृक्ष की जड़ में जल, दूध अर्पित करने एंव तने में रोली अक्षत लगाने के बाद सात परिक्रमा करने से दीर्घायु की प्राप्ति होती है। स्कंदपुराण के अनुसार अक्षय नवमी के दिन आवंले के वृक्ष के दर्शन मात्र से कई गुना फल प्राप्त होता है।


कंस के वध से पहले श्रीकृष्ण ने की थी, आवंला नवमी को तीन वनों की परिक्रमाः
आवंले वृक्ष के नीचे भोजन बनाकर ब्रह्मणों को भोजन कराने के उपरान्त स्वंय़ पूर्व की ओर मुख करके भोजन ग्रहण करने से मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है। यह भी माना जाता है भगवान कृष्ण ने कंस का वध करने से पहले आज के दिन मथुरा, वृंदावन और गुरुगोविन्द आदि तीन वनों की परिक्रमा की थी। जिसके कारण हिंदू धर्म में आवंला नवमी को इन तीर्थ स्थानों का भ्रमण और दर्शन अत्यंत शुभ माने जाते है।
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